जंगलों में बिछा सुरक्षा का अभेद्य जाल: शिकारियों की खैर नहीं, उत्तराखंड में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन मानसून’

Dehradun News: उत्तराखंड में जून महीने के दूसरे पखवाड़े में मानसून के दस्तक देने के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। इसे देखते हुए वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हो गया है। मानसून के दौरान वन्यजीवों के शिकार और तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे ‘ऑपरेशन मानसून’ नाम दिया गया है।

इस विशेष ऑपरेशन के तहत विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित राज्य के तमाम वन्यजीव बहुल वन प्रभागों में चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए इस बार आधुनिक तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। वन मुख्यालय ने इस संबंध में सभी जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

चुनौतीपूर्ण समय में शिकारियों पर कड़ा प्रहार

मानसून के दौरान उत्तराखंड के जंगलों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन, नदियों में उफान और जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। इन वजहों से जंगलों के कई दुर्गम इलाके मुख्य मार्गों से पूरी तरह कट जाते हैं। ऐसे कठिन समय में वनकर्मियों के लिए पैदल गश्त करना बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा काम साबित होता है।

पिछले सालों के कड़वे अनुभवों को देखें तो शिकारी और तस्कर इसी संवेदनशील समय का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। वे मौका पाकर वन्यजीवों को अपना निशाना बनाने की ताक में रहते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए वन विभाग ने इस बार ऐसी व्यूह रचना की है, जिसे भेद पाना तस्करों के लिए नामुमकिन होगा।

पालतू हाथी और ड्रोन संभालेंगे सुरक्षा का जिम्मा

इस बार ऑपरेशन मानसून को सफल बनाने के लिए वनकर्मियों की पैदल गश्त के साथ-साथ पालतू हाथियों की भी मदद ली जाएगी। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि रिजर्व के भीतर तेरह पालतू हाथियों को अलग-अलग संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त के लिए तैनात किया गया है। इसके अलावा चौदह आधुनिक ड्रोन कैमरों से आसमान से नजर रखी जाएगी।

दुर्गम क्षेत्रों में तैनात वनकर्मियों के लिए राशन और जरूरी दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक पहले ही पहुंचा दिया गया है। दूसरी तरफ, राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे ने जानकारी दी कि रिजर्व के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में दो-दो हाथियों की सेवाएं ली जा रही हैं। इसके साथ ही छह ड्रोन कैमरे भी घने जंगलों में हर हलचल पर पैनी नजर रखेंगे।

पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ संयुक्त अभियान

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इस बार उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं से सटे इलाकों में विशेष संयुक्त गश्त चलाई जाएगी। इसके लिए पड़ोसी राज्यों के संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा प्लान साझा किया जा चुका है। राज्य के भीतर भी अलग-अलग वन प्रभागों की सीमाओं पर अंतरप्रभागीय गश्त निरंतर रूप से चलाई जाएगी ताकि तस्कर बच न सकें।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के मैदानी और कीचड़ वाले इलाकों में गश्त के लिए ऑल टेरेन व्हीकल यानी एटीवी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही सीमावर्ती और संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग अपने खुफिया तंत्र को बेहद मजबूत कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से संदिग्धों की सूची तैयार की जा रही है ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

Author: Harish Rawat

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