Dehradun News: उत्तराखंड की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मध्याह्न भोजन योजना में हो रही गंभीर गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की शिकायतों का कड़ा संज्ञान लिया है।
शिक्षा मंत्री ने बिना कोई देरी किए इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के सख्त आदेश दे दिए हैं। सरकार के इस कड़े कदम से शिक्षा विभाग के भीतर हड़कंप मच गया है। इस जांच के दायरे में प्रदेश के कई बड़े और महत्वपूर्ण जिले शामिल किए गए हैं।
इन जिलों और ब्लॉकों में होगी सघन जांच
शिक्षा मंत्री ने बताया कि हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों के तमाम सरकारी स्कूलों के साथ-साथ नैनीताल जिले के रामनगर व हल्द्वानी में जांच होगी। इसके अलावा पौड़ी जिले के कोटद्वार और देहरादून जिले के डोईवाला, रायपुर, विकासनगर व सहसपुर ब्लॉक के विद्यालयों में भी जांच चलाई जाएगी।
पिछले कुछ समय से सरकार को विभिन्न स्तरों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों के माध्यम से मिड-डे मील योजना में भारी वित्तीय गड़बड़ियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों में बच्चों के भोजन को लेकर बेहद चौंकाने वाले और गंभीर खुलासे किए गए हैं।
कागजों पर फर्जी छात्र दिखाकर खाया जा रहा था अनाज
गंभीर शिकायतों के अनुसार, कुछ विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की वास्तविक नामांकन संख्या से कहीं अधिक खाद्यान्न की फर्जी प्रविष्टियां रजिस्टर में दर्ज की जा रही थीं। इसके साथ ही सरकारी गोदामों से खाद्यान्न की कुल प्राप्ति और बच्चों द्वारा उसकी वास्तविक खपत में जमीन-आसमान का बड़ा अंतर पाया गया है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कड़े शब्दों में कहा कि नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी इस अत्यंत महत्वपूर्ण योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह सीधे तौर पर बच्चों के अधिकारों पर डाका डालने जैसा घिनौना काम है।
दोषी पाए जाने पर होगी सीधे जेल की कार्रवाई
उन्होंने विभागीय आला अधिकारियों को इस पूरे मामले की पूरी तरह निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ किया है कि तय समय के भीतर जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले में सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
यदि जांच में किसी भी स्तर पर कोई वित्तीय अनियमितता या खाद्यान्न की चोरी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों एवं दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन और सीधे जेल भेजने जैसी कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
Author: Harish Rawat


