Dehradun News: प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक बेहद रोमांचक और बड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क (फूलों की घाटी) आज यानी 1 जून 2026 से पर्यटकों के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है।

पार्क प्रशासन ने इस साल पर्यटकों की सुरक्षा और सुगमता को ध्यान में रखते हुए ट्रैकिंग मार्गों की सभी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली थीं। यह खूबसूरत घाटी आगामी 31 अगस्त 2026 तक देश-विदेश के पर्यटकों के लिए खुली रहेगी, जहां लोग प्रकृति के अद्भुत नजारे देख सकेंगे।

हिमालयी क्षेत्र में करीब 87 वर्ग किलोमीटर के विशाल दायरे में फैली यह अनोखी घाटी 500 से भी अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों और अत्यंत दुर्लभ औषधीय पौधों का प्राकृतिक घर है। मानसून के मौसम में जब ये फूल एक साथ खिलते हैं, तो नजारा अलौकिक हो जाता है।
जुलाई और अगस्त में दिखेगा सबसे खूबसूरत नजारा
घाटी में यूं तो जून के महीने से ही रौनक शुरू हो जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई और अगस्त के महीनों को यहाँ की सैर के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ और परफेक्ट माना जाता है। इस दौरान होने वाली मानसूनी बारिश के कारण घाटी पूरी तरह जीवंत हो उठती है।

इन दो महीनों में पूरी घाटी ऑर्किड, पॉपी, डेजी, मैरीगोल्ड और प्रिमुला जैसे हजारों रंग-बिरंगे फूलों की प्राकृतिक चादर से पूरी तरह ढक जाती है। फोटोग्राफी, नेचर वॉक और शांति की तलाश करने वाले पर्यटकों के लिए इस समय से बेहतर कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता।
ऋषिकेश और गोविंदघाट से शुरू होता है रोमांचक सफर
फूलों की घाटी की यह विहंगम यात्रा उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित गोविंदघाट से शुरू होती है। इसके लिए पर्यटकों को सबसे पहले ऋषिकेश या हरिद्वार पहुंचना होता है, जहां से सड़क मार्ग के जरिए आसानी से गोविंदघाट तक का सफर तय किया जा सकता है।

गोविंदघाट पहुंचने के बाद पर्यटकों को करीब 13 किलोमीटर का बेहद खूबसूरत और रोमांचक ट्रैक पूरा करके घांघरिया बेस कैंप पहुंचना पड़ता है। इसके बाद अगले दिन घांघरिया से महज 4 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पूरी करके इस जन्नत यानी वैली ऑफ फ्लावर्स में प्रवेश मिलता है।
एंट्री परमिट और यात्रा से जुड़े कड़े नियम
हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए देहरादून का जॉली ग्रांट एयरपोर्ट सबसे नजदीक है, जबकि रेल यात्रियों के लिए ऋषिकेश सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। पार्क प्रशासन के कड़े नियमों के तहत घाटी के भीतर पर्यटकों को रात में रुकने की सख्त मनाही है।

सभी पर्यटकों को घाटी का दीदार करने के बाद हर हाल में शाम होने से पहले बेस कैंप घांघरिया वापस लौटना होता है। इसके साथ ही पार्क में प्रवेश के लिए मुख्य गेट पर एंट्री परमिट लेना अनिवार्य है। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए प्लास्टिक ले जाने पर भी कड़ा प्रतिबंध रहेगा।
Author: Harish Rawat


