Madhya Pradesh News: मध्यप्रदेश के दो बड़े शहरों में फूड डिलीवरी बॉयज के लिए नाइट शिफ्ट काल बन रही है। जबलपुर और भोपाल में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात बदमाशों ने डिलीवरी कर्मचारियों पर हमला कर दिया। बदमाशों ने इन मासूमों को घेरकर नकदी और मोबाइल लूट लिए।
पहली सनसनीखेज वारदात जबलपुर के अनवरगंज तिराहे के पास हुई। यहां 20 वर्षीय डिलीवरी बॉय शैलेश नोरिया एक ऑर्डर पहुंचाकर लौट रहा था। तभी तीन शातिर युवकों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। आरोपी शिवम उर्फ शुभम सोनकर ने उसकी बाइक की चाबी जबरन निकाल ली।
पीड़ित ने जब इसका विरोध किया तो बदमाशों ने उसकी जेब से 800 रुपये नकद, [Aadhaar Redacted] और बटुआ छीन लिया। इस बीच आरोपी देवराज ने चाकू से हमला कर शैलेश की बाईं जांघ को जख्मी कर दिया। पिल्ला नामक तीसरे आरोपी ने उसे लातों-मुक्कों से बुरी तरह पीटा।
भोपाल में डिलीवरी बॉय को पीटकर मोबाइल छीना
पीड़ित का दोस्त सीताराम जब मौके पर पहुंचा तो आरोपी तुरंत वहां से भाग निकले। हनुमंतल थाना पुलिस ने तीनों बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। रोते हुए पीड़ित शैलेश ने बताया कि लूटे गए पैसे उसकी पूरे दिन की खून-पसीने की कमाई थे।
दूसरी वारदात राजधानी भोपाल के शाहपुरा इलाके में हुई। यहां 20 वर्षीय संजू ठाकुर रात करीब 1:30 बजे बाइक से ऑर्डर डिलीवर करने जा रहे थे। तभी अरेरा कॉलोनी के पास तीन लोगों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों ने मारपीट कर उनका मोबाइल छीन लिया।
संजू ने हिम्मत दिखाई और तुरंत पास के पुलिस चेकपॉइंट पर पहुंचे। हबीबगंज और चुनाभट्टी पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से तीनों आरोपियों को मौके पर ही दबोच लिया। पकड़े गए बदमाशों में आशीष कनाडे, ब्रजेश वानखेड़े और एक 16 वर्षीय नाबालिग शामिल है।
एकांत और अंधेरी जगह बुलाकर लूटने का नया पैंतरा
पुलिस ने मुख्य आरोपी आशीष कनाडे के पास से लूटा हुआ मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। हबीबगंज थाने में आरोपियों के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज हुआ है। पूछताछ में बदमाशों के एक बेहद खतरनाक और नए तरीके का खुलासा हुआ है।
ये शातिर बदमाश जानबूझकर खुद ऑनलाइन ऑर्डर बुक करते हैं। इसके बाद वे डिलीवरी बॉय को किसी एकांत और घने अंधेरे वाली जगह पर बुलाते हैं। वहां पहुंचते ही वे हथियारों के बल पर डिलीवरी बॉय की पूरी कमाई और कीमती सामान लूट लेते हैं।
पुलिस के मुताबिक बदमाशों को पता होता है कि इन युवाओं के पास कुछ नकदी जरूर होती है। तय समय में खाना पहुंचाने का दबाव और रात की सुनसान सड़कें इन युवाओं को बेहद असुरक्षित बना रही हैं। अस्पतालों में घायल डिलीवरी स्टाफ की संख्या बढ़ रही है।
Author: Raj Thakur


