मंदसौर का ‘होर्मुज’ कहा जाने वाला सरदार पटेल चौराहा आखिरकार खुला, राहगीरों को मिली राहत लेकिन श्रेय लेने की मची होड़

Madhya Pradesh News: मंदसौर में सोशल मीडिया पर ‘होर्मुज’ के नाम से चर्चित सरदार पटेल चौराहा आखिरकार आम जनता के लिए खोल दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने काफी समय से इस प्रमुख मार्ग पर भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। इस वजह से शहर के दो व्यस्ततम इलाकों का रास्ता पूरी तरह बंद था।

रास्ते बंद होने के कारण शहर के लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय प्रशासन के इस मनमाने रवैये के खिलाफ व्यापारियों और राहगीरों में गहरा आक्रोश व्याप्त था। लोग काफी समय से इस चौराहे के सभी रास्तों को दोबारा खोलने की मांग कर रहे थे।

रास्ता खुलवाने के लिए सड़क पर उतरी कांग्रेस और भाजपा

सड़क खोलने की इस मांग को लेकर शहर में कई बार बड़े आंदोलन और उग्र प्रदर्शन हुए। विपक्षी दल कांग्रेस ने जिला पंचायत सदस्य दीपक सिंह चौहान के नेतृत्व में चौराहे पर लंबा धरना दिया था। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस बल के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई थी।

जनता के बढ़ते दबाव को देखते हुए सत्तारूढ़ दल भाजपा के स्थानीय नेता भी सक्रिय हुए थे। भाजपा विधायकों और पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर से मिलकर बेरिकेड्स हटाने का अनुरोध किया था। लेकिन राजनीतिक खींचतान के चलते प्रशासन इस पर कोई भी अंतिम निर्णय लेने से लगातार बचता रहा।

क्रेडिट वॉर के चक्कर में कई दिनों तक फंसा रहा मामला

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, प्रशासन इस चौराहे को खोलने का श्रेय कांग्रेस को बिल्कुल नहीं देना चाहता था। यही वजह थी कि कांग्रेस के बड़े आंदोलन के तुरंत बाद बैरिकेडिंग नहीं हटाई गई। सत्ता पक्ष इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर सही मौके का इंतजार कर रहा था।

दो दिन पहले मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष रमा देवी गुर्जर के नेतृत्व में भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिला। इस बैठक में चौराहे से तुरंत अवरोध हटाने की औपचारिकता पूरी की गई। इसके ठीक बाद आज प्रशासनिक अमले ने बैरिकेड्स हटाकर रास्ता साफ कर दिया।

चौराहे पर आतिशबाजी कर दोनों दलों ने मनाया अपनी जीत का जश्न

रास्ता खुलते ही शहर में राजनीतिक श्रेय लेने की जंग तेज हो गई है। भाजपा इसे अपनी प्रशासनिक सफलता बता रही है। वहीं कांग्रेस ने इस फैसले को अपनी जमीनी लड़ाई की जीत माना है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तो चौराहे पर इकट्ठा होकर जमकर आतिशबाजी भी की।

इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में सत्ताधारी दल के भीतर चल रही भयंकर गुटबाजी को भी उजागर कर दिया है। नेताओं की आपसी खींचतान का फायदा स्थानीय सरकारी अधिकारी उठा रहे हैं। अधिकारी कई नीतिगत फैसले अपने स्तर पर ले रहे हैं, जिससे जनता परेशान हो रही है।

Author: Vijay Chouhan

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