Washington News: सीरिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक अपना औपचारिक कार्यकाल खत्म होने के बाद पद से हट रहे हैं। हालांकि इसके बाद भी वे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी कूटनीति का मुख्य चेहरा बने रहेंगे। वे सीरिया और इराक की रणनीतिक नीतियों को संभालेंगे।
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बड़े फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भले ही टॉम बैरक का विशेष दूत का टाइटल खत्म हो रहा है। इसके बावजूद वे दोनों देशों के लिए अमेरिकी नीति के मुख्य रणनीतिकार बने रहेंगे।
विदेश सचिव रुबियो ने लिखा कि राजदूत टॉम बैरक सीरिया में एक केंद्रीय मध्यस्थ रहे हैं। इराक के मामलों में भी वे एक बेहद भरोसेमंद राजनयिक हाथ साबित हुए हैं। वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।
तुर्किए में अमेरिकी राजदूत की भूमिका निभाते रहेंगे
टॉम बैरक वर्तमान में तुर्किए गणराज्य में अमेरिका के मुख्य राजदूत के रूप में काम कर रहे हैं। वे सीरियाई सरकार के साथ राष्ट्रपति ट्रंप के रणनीतिक सहयोग को बढ़ा रहे हैं। इसके साथ ही वे इराक की नई सरकार के साथ भी अहम संवाद शुरू करेंगे।
विदेश सचिव मार्को रुबियो ने बैरक की क्षमताओं पर अपना पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि टॉम बैरक अमेरिकी राष्ट्रपति की कोर टीम के एक बेहद जरूरी सदस्य हैं। वे अमेरिकी राज्य विभाग के पूर्ण समर्थन और विश्वास के साथ काम करते हैं।
रुबियो ने कहा कि इस कठिन काम को लगातार लीड करने की बैरक की इच्छा सराहनीय है। उनकी इस प्रतिबद्धता से अमेरिकी लोगों और देश के हितों को बड़ा फायदा मिल रहा है। उनकी विशेषज्ञता और वैश्विक संबंध अमेरिका को हमेशा बड़ी जीत दिलाते रहेंगे।
ट्रंप के सबसे भरोसेमंद अरबपति रियल एस्टेट निवेशक
टॉम बैरक मूल रूप से एक अरबपति रियल एस्टेट निवेशक हैं। वे लंबे समय से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी और भरोसेमंद सहयोगियों में शामिल रहे हैं। वे मई 2025 से सीरिया में ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत की जिम्मेदारी निभा रहे थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीरियाई दूत के रूप में अपने एक साल के कार्यकाल में बैरक ने बड़ा बदलाव देखा। उन्होंने सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के असद-पश्चात प्रशासन की तरफ वाशिंगटन के कूटनीतिक झुकाव को बेहद करीब से मैनेज किया।
टॉम बैरक ने सीरिया की राजधानी दमिश्क पर लगे भारी आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दिलाई। उन्होंने तुर्किए और खाड़ी देशों के साथ मिलकर इस्लामिक स्टेट के खिलाफ सैन्य अभियानों को कोऑर्डिनेट किया। इस रणनीति से उन्होंने अमेरिकी विदेश नीति पर अमिट छाप छोड़ी है।
Author: Pallavi Sharma

