Lucknow News: लखनऊ के दो वरिष्ठ प्रोफेसरों ने मिलकर एक अनोखा कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने टेक्नोलॉजी, साहित्य और डिजाइनिंग के संगम से एक अनूठा एजुकेशनल डिस्प्ले डिवाइस तैयार किया है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस अनूठी तकनीक को आधिकारिक तौर पर पेटेंट भी प्रदान कर दिया है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आरपी सिंह और डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. अल्का सिंह ने इस डिवाइस को विकसित किया है। यह ‘थ्री डी रिबन बेस्ड एजुकेशनल इंस्ट्रूमेंट’ छात्रों को इतिहास को नए और तकनीकी नजरिए से समझने में मदद करेगा।
थ्री डी तकनीक से आसान होगा अंग्रेजी का कालक्रम
यह आधुनिक डिवाइस पुनर्जागरण काल से लेकर उत्तर आधुनिक काल तक के अंग्रेजी साहित्य के विकास को कालक्रमानुसार दिखाता है। डिजिटल परफॉर्मेंस और भौतिक ज्यामिति के मेल से इतिहास को देखना अब बेहद आसान हो गया है। इस विजुअल डिस्प्ले के जरिए छात्र पूरे कालक्रम को जल्दी याद रख सकेंगे।
एलयू के प्रोफेसर डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि इस डिवाइस में एक रिबन-युक्त इलेक्ट्रॉनिक विजुअल इंस्ट्रूमेंट लगा है। इस इंस्ट्रूमेंट को एकीकृत थ्री डी वास्तुशिल्पीय रूप में ढाला गया है। यह जटिल साहित्यिक इतिहास को बेहद सरल और आकर्षक तरीके से सामने प्रस्तुत करता है।
प्रोफेसर सिंह के अनुसार डिवाइस में एक खास धात्विक रिबन संरचना बनाई गई है, जो इसकी पूरी लंबाई में फैली हुई है। यह रिबन लहरदार, सीधी और शेवरॉन जैसे विभिन्न खंड बनाती है। रिबन के मोड़ और इसकी गति साहित्यिक चिंतन और शैली में आए बदलावों को दर्शाते हैं।
यह उपकरण मुख्य रूप से अंग्रेजी साहित्य की एक जीवंत विजुअल टाइमलाइन के रूप में काम करता है। इससे विद्यार्थियों को कठिन विषयों को रटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा में इस इनोवेटिव डिवाइस के आने से पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।
Author: Ajay Mishra


