Shimla News: हिमाचल प्रदेश के शिमला में भूस्खलन से सेब बागान को हुए भारी नुकसान के मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बड़ा यू-टर्न लिया है। पहले घटना को ‘एक्ट ऑफ गॉड’ बताने वाली NHAI अब बाग मालिक को 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा देने पर सहमत हो गई है। इसके बाद मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से वापस ले लिया गया।
यह मामला कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर चल रही फोरलेन परियोजना से जुड़ा है। ढल्ली के पास रहने वाले नरिंदर सिंह राठौड़ का करीब 50 बीघा का सेब बाग सड़क परियोजना क्षेत्र से नीचे घाटी में स्थित है। मई 2025 में भूस्खलन के बाद वहां लगी क्रेट वॉल ढह गई थी। इससे बगीचे में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
क्रेट वॉल गिरने से बढ़ा पूरा विवाद
नरिंदर सिंह राठौड़ ने NGT में दायर याचिका में दावा किया कि हाईवे निर्माण के दौरान लगाई गई क्रेट वॉल बिना मजबूत नींव के बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि दीवारों की हालत देखकर पहले ही अधिकारियों को चेतावनी दी गई थी। हादसे से एक सप्ताह पहले भी उन्होंने लिखित शिकायत भेजी थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
याचिकाकर्ता ने कहा कि 25 मई 2025 को अचानक क्रेट वॉल टूट गई और भारी मलबा उनके बगीचे में जा गिरा। इससे सैकड़ों फलदार पेड़ क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने NHAI और परियोजना से जुड़ी कंसेशनेयर कंपनी को इस नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया और करीब 440 सेब के पेड़ों के मुआवजे की मांग की।
बारिश को जिम्मेदार बताकर बचती रही अथॉरिटी
सुनवाई के दौरान NHAI ने शुरुआत में खुद को जिम्मेदारी से अलग रखने की कोशिश की। अथॉरिटी ने NGT में कहा कि भूस्खलन असाधारण प्राकृतिक घटना थी। उसने इसे ‘दैवीय आपदा’ यानी ‘Act of God’ और ‘Vis Major’ की श्रेणी में रखा। इसके समर्थन में मौसम विभाग की मई 2025 की बारिश रिपोर्ट भी पेश की गई।
हालांकि बागवानी विभाग की रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दे दिया। विभाग ने ट्रिब्यूनल को बताया कि भूस्खलन और मलबे की वजह से करीब 550 फल देने वाले सेब के पौधे प्रभावित हुए थे। दूसरी ओर NHAI का दावा था कि सिर्फ 40 पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। इसी अंतर को लेकर दोनों पक्षों में लंबी बहस चली।
निरीक्षण के बाद बदला NHAI का रुख
लगातार सुनवाई और स्थानीय निरीक्षण के बाद NHAI ने अपना रुख बदल दिया। अधिकारियों ने मौके पर जाकर नुकसान का आकलन किया। इसके बाद बाग मालिक को 1 करोड़ 80 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति बनी। याचिकाकर्ता के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि समझौते के बाद उनका क्लाइंट केस वापस ले रहा है।
कालका-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग-5 परियोजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद दहिया ने माना कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सावधानी बरतने के बावजूद कुछ मामलों में नुकसान की आशंका बनी रहती है। वहीं इस फैसले को पहाड़ी इलाकों में चल रही सड़क परियोजनाओं और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Author: Sunita Gupta


