Raja Randhir Singh Death: भारतीय खेल जगत को बड़ा झटका, दिग्गज खेल प्रशासक और पूर्व निशानेबाज राजा रणधीर सिंह का निधन

Sports News: भारतीय खेल जगत के लिए बुधवार 27 मई की सुबह एक बेहद दुखद खबर लेकर आई। देश के दिग्गज खेल प्रशासक और पूर्व महान निशानेबाज राजा रणधीर सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने 79 वर्ष की आयु में नई दिल्ली स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली।

मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के पूर्व सचिव रणधीर सिंह पिछले काफी समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। कुछ दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद वे अपने घर लौटे थे, जहां उनका निधन हो गया। उनके जाने से खेल जगत में शोक की लहर है।

रणधीर सिंह पटियाला के महाराजा और पूर्व क्रिकेटर भूपिंदर सिंह के वंशज थे। खेल की दुनिया में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे एक बेहतरीन ट्रैप शूटर थे और उन्होंने खेल के मैदान पर देश का मान वैश्विक स्तर पर काफी बढ़ाया था।

एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय शूटर

राजा रणधीर सिंह ने 1978 में बैंकॉक में आयोजित हुए एशियन गेम्स के ट्रैप शूटिंग इवेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। इस ऐतिहासिक स्वर्णिम सफलता के साथ ही वे एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले निशानेबाज बने थे।

उनकी इस अद्भुत खेल सफलता को देखते हुए साल 1979 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया था। इसके बाद उन्होंने 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय टीम में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

रणधीर सिंह ने निशानेबाजी में अपने हुनर के दम पर रिकॉर्ड कायम किए। उन्होंने साल 1968 से लेकर 1984 तक लगातार पांच बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। खेल से संन्यास लेने के बाद भी वे खेलों के विकास से लगातार जुड़े रहे।

बतौर खेल प्रशासक भी हासिल की बड़ी सफलता

निशानेबाजी के करियर के बाद रणधीर सिंह ने बतौर खेल प्रशासक भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। उन्हें देश के सबसे लोकप्रिय और सफल खेल प्रशासकों में गिना जाता है। वे साल 1987 से 2012 तक लगातार भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के सचिव पद पर रहे।

इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर उनकी साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे साल 2001 से 2014 तक इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के प्रतिष्ठित सदस्य भी रहे। उनके कार्यकाल में भारतीय खेलों को एक नई दिशा और पहचान मिली थी।

Author: Prem Sharma

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