Beijing News: चीन में धूम्रपान रोकने के लिए सख्त कानून और टैक्स बढ़ोतरी के बावजूद सिगरेट की खपत लगातार बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, चीनी नागरिक हर साल 2.4 ट्रिलियन सिगरेट पी जाते हैं। यह दुनिया भर में होने वाली कुल सिगरेट खपत का लगभग आधा हिस्सा माना जा रहा है।
चाइनीज सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल के आंकड़े बताते हैं कि चीन अब भी दुनिया का सबसे बड़ा तंबाकू उपभोक्ता बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2003 से 2023 के बीच दुनिया में सिगरेट खपत में 26 प्रतिशत गिरावट दर्ज हुई, लेकिन इसी अवधि में चीन में यह आंकड़ा करीब 39 प्रतिशत बढ़ गया।
शी जिनपिंग का वादा भी नहीं बदल पाया हालात
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालने के बाद धूम्रपान कम करने का वादा किया था। उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों पर खुद के सिगरेट छोड़ने का जिक्र भी किया। इसके बावजूद चीन में धूम्रपान की दर में कोई बड़ी कमी देखने को नहीं मिली।
चीन की कुल आबादी करीब 140 करोड़ है। इनमें लगभग 23 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं। यानी करीब 30 करोड़ चीनी नागरिक नियमित रूप से सिगरेट पीते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट भी चीन को वैश्विक तंबाकू संकट का सबसे बड़ा केंद्र मानती है।
सख्त कानून और टैक्स बढ़ाने के बाद भी असर नहीं
चीन सरकार ने तंबाकू नियंत्रण के लिए कई नियम लागू किए हैं। 18 साल से कम उम्र के लोगों को सिगरेट बेचना अपराध है। सार्वजनिक परिवहन और कई सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर रोक लगी हुई है। इसके अलावा सरकार ने 2022 में सिगरेट पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी लगाया था।
सरकार ने ई-सिगरेट और वेपिंग पर भी कड़े नियम लागू किए। ऑनलाइन बिक्री पर निगरानी बढ़ाई गई और युवाओं तक पहुंच रोकने के लिए कई प्रतिबंध लगाए गए। इसके बावजूद बड़े शहरों से लेकर छोटे इलाकों तक धूम्रपान की आदत तेजी से बनी हुई है।
चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है तंबाकू कारोबार
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन में सिगरेट खपत कम नहीं होने का सबसे बड़ा कारण वहां का विशाल तंबाकू उद्योग है। चाइना नेशनल टोबैको कॉरपोरेशन देश में सिगरेट उत्पादन और बिक्री संभालती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कंपनी का शुद्ध मुनाफा करीब 244 बिलियन डॉलर रहा।
यह कंपनी चीन सरकार की कुल आय में लगभग 7 प्रतिशत योगदान देती है। कोरोना महामारी के बाद आर्थिक दबाव बढ़ने पर सरकार ने इस उद्योग को और मजबूती दी। यही वजह रही कि तंबाकू नियंत्रण के कई सख्त नियम कागजों तक सीमित रह गए और खपत में अपेक्षित गिरावट नहीं आ सकी।
Author: Pallavi Sharma

