झारखंड में ‘बंगाली दांव’ खेलने की तैयारी में बीजेपी, क्या मिशनरियों और घुसपैठियों पर गिरेगी गाज?

Jharkhand News: पश्चिम बंगाल में मिली जीत के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की नजरें झारखंड पर टिक गई हैं। पार्टी यहां मतांतरण, डि-लिस्टिंग और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे बड़े मुद्दों को हथियार बना रही है। हाल ही में दिल्ली के लाल किले पर हुआ भव्य जनजातीय समागम इस नई रणनीति का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है।

भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर यह बड़ा आयोजन किया गया था। इस समागम में देशभर से लगभग डेढ़ लाख जनजातीय लोगों ने अपनी जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई। इतनी बड़ी भीड़ देखकर भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिकार काफी उत्साहित हैं। वे इसे आने वाले चुनावों के लिए एक शुभ संकेत मान रहे हैं।

संविधान संशोधन और डि-लिस्टिंग की उठी मांग

जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हांसदा ने सरकार के सामने एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने कहा कि देश भर में जनजातीय समाज की 750 श्रेणियां हैं। मंच लंबे समय से यह मांग कर रहा है कि मतांतरण करने वाले लोगों को आरक्षण के दायरे से पूरी तरह बाहर किया जाना चाहिए।

डॉ. हांसदा ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी उनकी मांगों से सहमत है, तो उसे तुरंत संसद में एक विधेयक लाना चाहिए। इस विशाल समागम के जरिए मंच ने विरोधी दलों और मिशनरियों को अपनी ताकत का कड़ा अहसास कराया है।

तुष्टीकरण की राजनीति का होगा अंत

गोड्डा लोकसभा सीट से सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने इस मामले पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति का दौर अब हमेशा के लिए खत्म होने वाला है। बंगाल के नतीजों ने साबित कर दिया है कि जनता अब केवल राष्ट्रवाद को समर्थन दे रही है।

सांसद दुबे ने यह भी कहा कि भाजपा सबका साथ और सबका विकास की नीति पर अडिग है। दूसरी तरफ जनजाति मंच अब राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को अपना मांग पत्र सौंपने जा रहा है। कुल मिलाकर झारखंड में राजनीतिक तापमान बहुत तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले दिन काफी दिलचस्प होने वाले हैं।

Author: Rohit Mahato

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