Business News: वैश्विक मुद्रा बाजार में इस समय एक बहुत ही हैरान करने वाली हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गोते लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश चीन की करेंसी युआन लगातार नया इतिहास रच रही है।
बीते 19 मई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ऐतिहासिक गिरावट के साथ रिकॉर्ड 96.970 के स्तर तक चला गया था। इस अचानक आई बड़ी गिरावट से भारतीय आर्थिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। रिजर्व बैंक अब स्थिति संभालने के लिए कड़े कदम उठा रहा है।
आरबीआई उठाने जा रहा है कई बेहद कड़े और बड़े कदम
भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की इस लगातार जारी गिरावट को रोकने के लिए कई मजबूत विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बैंकिंग रिपोर्टों के अनुसार केंद्रीय बैंक देश में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर बाजार से नकदी कम करने की योजना बना रहा है।
इसके अलावा आरबीआई विभिन्न देशों के साथ करेंसी स्वैप बढ़ाने और विदेशी निवेशकों के जरिए भारी डॉलर जुटाने जैसे सख्त कदम उठाएगा। इन त्वरित उपायों का मुख्य उद्देश्य भारतीय मुद्रा को और ज्यादा डूबने से बचाना तथा बाजार में स्थिरता लाना है।
तीन साल के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंची चीनी मुद्रा
भारतीय मुद्रा के ठीक उलट चीन की करेंसी युआन इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने पिछले 3 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। साउथ चाइना पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीनी युआन अब तक के सबसे मजबूत दौर में है।
चीनी मुद्रा की इस अभूतपूर्व मजबूती को देखते हुए दुनिया भर के बड़े ग्लोबल बैंक इस समय युआन को लेकर लगातार बुलिश नजर आ रहे हैं। वैश्विक निवेशकों का चीनी बाजारों पर भरोसा तेजी से बढ़ा है, जिससे युआन को लगातार भारी सपोर्ट मिल रहा है।
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने तय की मजबूत फिक्सिंग दर
चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने गुरुवार को युआन की मिड पॉइंट दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6.8349 पर तय कर दी। इसे बाजार में डेली फिक्सिंग दर भी कहा जाता है, जो साल 2023 के बाद से सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।
इससे पहले बुधवार को भी चीनी करेंसी युआन में 0.22 फीसदी की शानदार तेजी देखी गई थी। हालांकि पिछले पूरे सप्ताह के दौरान चीनी करेंसी में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा था। इसके बावजूद गुरुवार को युआन डॉलर के मुकाबले 6.803 पर मजबूती से ट्रेड करता दिखा।
जानिए कैसे काम करता है चीन का सीक्रेट पैरिटी सिस्टम
दरअसल पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) अपनी घरेलू करेंसी को डॉलर के साथ सीधे फिक्स नहीं करता है। चीनी बैंक इसके बजाय अपनी करेंसी को डेली फिक्सिंग रेट यानी एक खास “सेंट्रल पैरिटी” मैकेनिज्म के जरिए बहुत चालाकी से मैनेज करता है।
रोजाना घरेलू मार्केट खुलने से ठीक पहले चीन का सेंट्रल बैंक युआन और अमेरिकी डॉलर के बीच एक रेफरेंस रेट तय कर देता है। इस निर्धारित दायरे के भीतर ही युआन पूरे दिन कारोबार करता है। यह तय दर से सिर्फ 2% ऊपर या नीचे ही घूम सकता है।
बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए खास रणनीति
चीन का केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा का मूल्य सिर्फ अमेरिकी डॉलर से नहीं आंकता है। वह कई बड़ी वैश्विक मुद्राओं के एक समूह (basket of currencies) के मुकाबले युआन की कीमत को बेहद प्रभावी ढंग से हर दिन नियंत्रित और संचालित करता है।
यह रेफरेंस रेट तय करने के लिए चीन पिछले दिन की क्लोजिंग, बाजार में विदेशी मुद्रा की मांग और डॉलर की वैश्विक स्थिति को देखता है। इसका मुख्य उद्देश्य मुद्रा बाजार में आने वाले भारी उतार-चढ़ाव और अचानक होने वाली भारी गिरावट को रोकना है।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों ने युआन के लिए दिया बड़ा टारगेट
अमेरिका के दिग्गज बैंक ऑफ अमेरिका ने हाल ही में जारी अपने एक नोट में चीनी करेंसी को लेकर बहुत बड़ा दावा किया है। बैंक के विश्लेषकों के अनुसार साल 2026 के अंत तक चीनी युआन और मजबूत होकर 6.70 प्रति डॉलर तक पहुंचेगा।
इसके साथ ही दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने भी युआन को लेकर अपना पुराना अनुमान काफी बढ़ा दिया है। गोल्डमैन के मुताबिक चीनी मुद्रा अगले तीन महीनों में 6.80, छह महीनों में 6.70 और अगले एक साल में 6.50 तक मजबूत हो जाएगी।
Author: Rajesh Kumar


