New Delhi News: देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अगले एक साल तक नया सोना न खरीदने की विशेष अपील की है। इस अपील के बाद देश में कई लोग अपने पुराने गहनों को बदलकर नए डिजाइन के आभूषण बनवाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हालांकि, टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सिर्फ एक साधारण एक्सचेंज नहीं है, बल्कि आयकर नियमों के तहत इसे बकायदा पूंजीगत संपत्ति का ट्रांसफर माना जाता है जिस पर आपको भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है।
पुराने आभूषणों के एडजस्टमेंट को माना जाता है बिक्री
जब भी कोई ग्राहक अपने पुराने गहनों की वैल्यू को नए गहनों की कीमत के साथ एडजस्ट करवाता है, तो आयकर विभाग की नजर में इसे सोने की बिक्री माना जाता है। पुराने गहनों की मूल खरीद कीमत और उनकी आज की मौजूदा बाजार कीमत के बीच के अंतर को आपका शुद्ध मुनाफा माना जाता है। इसी मुनाफे पर सरकार कैपिटल गेन टैक्स वसूलती है। यह टैक्स पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वे पुराने गहने आपके पास कुल कितने समय तक रहे थे।
शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म मुनाफे पर टैक्स के नियम
आयकर नियमों के अनुसार, यदि सोने के गहने आपके पास 24 महीने से अधिक समय तक रखे गए हैं, तो एक्सचेंज से होने वाले मुनाफे को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाएगा और इस पर सीधे 12.5% की दर से टैक्स लगेगा। इसके विपरीत, यदि गहने खरीदने के 24 महीने या उससे कम समय के भीतर ही उन्हें बदला जाता है, तो यह मुनाफा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) कहलाएगा। इस स्थिति में टैक्स की गणना करदाता के मौजूदा रेगुलर इनकम टैक्स स्लैब के आधार पर की जाएगी।
आईटीआर फाइलिंग में जानकारी देना है बेहद जरूरी
सोने के गहनों की बिक्री या उनके एक्सचेंज से होने वाले हर एक मुनाफे की सही जानकारी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय देना अनिवार्य है। इस कैपिटल गेन की पूरी डिटेल को आईटीआर के ‘Schedule CG’ में भरना होता है ताकि भविष्य में आयकर विभाग के किसी भी कानूनी नोटिस या जांच से बचा जा सके। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े ज्वेलर्स के लिए 2 लाख रुपये से अधिक के कैश ट्रांजैक्शन की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य है, जो बाद में आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में भी दर्ज हो जाती है। होल्डिंग अवधि (सोना रखने का समय) गैन का प्रकार (Capital Gain Type) टैक्स की दर (Tax Rate) 24 महीने से अधिक लॉन्ग टर्म कैपिटल गैन (LTCG) 12.5% फ्लैट टैक्स 24 महीने या उससे कम शॉर्ट टर्म कैपिटल गैन (STCG) करदाता के टैक्स स्लैब के अनुसार
विरासत में मिले पुरखों के गहनों पर क्या हैं नियम?
यदि आपको अपने माता-पिता या पुरखों से विरासत में कोई ऐसे गहने मिले हैं जो 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदे गए थे, तो टैक्स की गणना के लिए उस तारीख की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) को ही मूल खरीद कीमत माना जा सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि 2001 के बाद खरीदे गए आभूषणों के पक्के दस्तावेज या बिल मौजूद नहीं हैं, तो सरकार से मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट बहुत जरूरी हो जाती है। यह रिपोर्ट आयकर जांच के समय एक पुख्ता कानूनी सबूत के रूप में काम आती है।
पुराने आभूषणों को बदलवाने पर ज्वेलर्स की कटौतियां
टैक्स के अलावा, पुराने गहनों को पिघलाने, साफ करने और रिफाइन करने की प्रक्रिया में सोने का कुछ हिस्सा हमेशा खराब होता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए ज्वेलर्स आमतौर पर 5% से 8% तक का वेस्टेज चार्ज काटते हैं। इसके अतिरिक्त, आभूषणों में जड़े हुए कीमती पत्थर, मोती, मीनाकारी या अन्य गैर-सोने की चीजों का वजन कुल भार से पूरी तरह घटा दिया जाता है और सिर्फ शुद्ध सोने का वजन ही मान्य होता है। बाजार के जोखिम को देखते हुए कुछ ज्वेलर्स अतिरिक्त मूल्य कटौती भी कर सकते हैं।

