Business News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भारी तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारतीय बाजारों पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों ने देश में महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और पूर्व आईएमएफ डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने इस संकट पर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर वैश्विक हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
पेट्रोल-डीजल और गैस के दामों में हो सकती है भारी बढ़ोतरी
कच्चे तेल में इतनी बड़ी तेजी आने से भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। गोपीनाथ के मुताबिक कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने से आम जनता और घरेलू कारोबार दोनों पर भारी दबाव बढ़ रहा है।
इस संकट के बीच कई बड़ी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है। अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो भारत की जीडीपी ग्रोथ पर करीब 0.5% का सीधा असर पड़ सकता है।
मौजूदा संकट 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़ा
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो यह असर बढ़कर पूरे 1% तक हो सकता है। गोपीनाथ ने साफ कहा कि यह मौजूदा संकट साल 1970 के दशक में आए ऐतिहासिक तेल संकट से भी बहुत बड़ा साबित हो सकता है।
उन्होंने इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारतीय बाजारों में घरेलू खपत में संयम बरतने की सलाह दी है। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी आयात को तुरंत कम करने की जरूरत पर भी विशेष जोर दिया, ताकि आर्थिक संतुलन को बिगड़ने से बचाया जा सके।
भारतीय रुपए की ऐतिहासिक कमजोरी के अपने अनोखे फायदे
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी को लेकर उन्होंने एक बेहद दिलचस्प बात कही है। उन्होंने कहा कि रुपए का कमजोर होना पूरी तरह से नकारात्मक नहीं है। यह स्थिति भारत का विदेशी आयात कम करने में बहुत बड़ी मदद करती है।
आयात कम होने से देश के मूल्यवान विदेशी मुद्रा भंडार पर अचानक दबाव काफी घट जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी है। उनके मुताबिक दोनों नियामक संस्थाओं को बाजार में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
मजबूत घरेलू मांग से बाहरी झटकों को झेलेगा भारत
गीता गोपीनाथ ने कहा कि वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आने से देश में महंगाई और ईंधन की दरें बढ़ना बिल्कुल स्वाभाविक है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया में सबसे मजबूत स्थिति में बनी हुई है, जिससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
देश की मजबूत घरेलू मांग और बेहतर मैक्रोइकोनॉमिक आधार भारत को ऐसे बड़े बाहरी आर्थिक झटकों से पूरी तरह सुरक्षित रखेंगे। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि सही सरकारी नीतियों और समय पर किए गए आर्थिक सुधारों के जरिए भारत इस चुनौती से आसानी से निपट लेगा।
Author: Rajesh Kumar

