Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) का आरक्षण निर्धारित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन कर दिया है। इस आयोग का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से छह महीने का होगा।
आयोग की अध्यक्षता इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह करेंगे। उनके साथ पांच सदस्यीय इस आयोग में चार अन्य सदस्य भी नियुक्त किए गए हैं। यह आयोग पंचायतों में ओबीसी समुदाय की वर्तमान सामाजिक स्थिति, आरक्षण की प्रकृति और इसके प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
आयोग की संरचना और जिम्मेदारी
आयोग में सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह के अलावा चार अनुभवी सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह हैं। ये सदस्य मिलकर ओबीसी आरक्षण के स्वरूप और सीमा पर सिफारिशें तैयार करेंगे।
न्यायाधीश राम औतार सिंह का पिछला अनुभव इस नियुक्ति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2023 में नगरीय निकाय चुनावों के दौरान भी उन्होंने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में व्यापक सर्वे किया था। उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया था, जिसे अब पंचायत चुनावों के लिए आधार बनाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की ट्रिपल टेस्ट व्यवस्था
पंचायत चुनावों में यह आयोग सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ व्यवस्था को पूरा करने के लिए गठित किया गया है। स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को वैध बनाने के लिए इस तरह के समर्पित आयोग का गठन अनिवार्य है। यह आयोग राज्य में पिछड़े वर्ग की सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक भागीदारी का बारीकी से विश्लेषण करेगा।
पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार की ओर से जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय व अन्य सुविधाओं के लिए दिशा-निर्देश बाद में जारी किए जाएंगे। इस आयोग की सिफारिशें ही पंचायत चुनावों में आरक्षण का खाका तैयार करेंगी, जो प्रदेश की ग्रामीण राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।
Author: Ajay Mishra

