Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश में लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरें यथावत रहने की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं पर स्मार्ट मीटर के खर्च का अतिरिक्त बोझ डालने की योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में पावर कारपोरेशन के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (ARR) प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इस दौरान परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बिजली कंपनियों के 16,448 करोड़ रुपये के घाटे के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे दरों में बढ़ोतरी की साजिश बताया है। उन्होंने कंपनियों पर पहले से मौजूद 51 हजार करोड़ रुपये के सरप्लस का हवाला दिया है।
बिजली दरों में कमी की मांग
परिषद अध्यक्ष ने स्पष्ट तर्क दिया है कि जब बिजली कंपनियों के पास 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस उपलब्ध है, तो दरों को बढ़ाने के बजाय उन्हें कम करने के उपाय किए जाने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि इस सरप्लस को सही तरीके से समायोजित किया जाए, तो बिजली दरों में एकमुश्त 45 प्रतिशत तक की बड़ी कटौती संभव है।
इतना ही नहीं, उन्होंने एक वैकल्पिक सुझाव भी दिया है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों तक बिजली की दरों में प्रतिवर्ष आठ प्रतिशत की कमी की जा सकती है। यह प्रस्ताव आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो लंबे समय से महंगाई और बिजली बिलों के बोझ तले दबे हुए हैं।
स्मार्ट मीटर परियोजना पर गंभीर सवाल
स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना को लेकर भी परिषद ने सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए हैं। 3,838 करोड़ रुपये का वित्तीय भार सीधे उपभोक्ताओं पर डालना जनहित के खिलाफ बताया गया है। केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार यह योजना पूरी तरह मुफ्त होनी चाहिए, न कि उपभोक्ताओं की जेब से इसका खर्च वसूला जाए।
इसके अलावा, स्मार्ट मीटर परियोजना की लागत 18,885 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 27,342 करोड़ रुपये किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। परिषद ने मांग की है कि इस परियोजना पर बढ़ा हुआ नौ हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आम जनता पर न डाला जाए और इसे तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।
टीओडी टैरिफ और भविष्य की राह
बैठक में टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ पर भी चर्चा हुई। जहां नोएडा पावर कंपनी इसे लागू करने के पक्ष में दिखी, वहीं परिषद ने इसका कड़ा विरोध किया है। अध्यक्ष का मानना है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह प्रणाली आर्थिक नुकसान का कारण बनेगी। अब सभी की निगाहें जून के दूसरे सप्ताह पर टिकी हैं, जब आयोग अपना अंतिम टैरिफ ऑर्डर जारी करेगा।
इसके साथ ही, नोएडा पावर कंपनी में कथित अनियमितताओं की सीएजी (CAG) जांच की मांग भी जोर पकड़ रही है। पावर कारपोरेशन को अब उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए रोस्टर व्यवस्था समाप्त कर 24 घंटे निर्बाध बिजली देने की दिशा में कदम उठाने होंगे। आयोग द्वारा लिया जाने वाला आगामी निर्णय राज्य के लाखों परिवारों की जेब पर सीधा असर डालेगा।
Author: Ajay Mishra

