China News: चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कुछ ही दिनों के भीतर दुनिया की दो सबसे ताकतवर हस्तियों का बीजिंग में भव्य स्वागत किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल के बाहर एक जैसा सैन्य सम्मान मिला। लेकिन इस दिखावे के पीछे दोनों यात्राओं के कूटनीतिक संदेश काफी अलग थे।
हवाई अड्डे से ही दिखने लगा कूटनीतिक अंतर
बीजिंग ने दोनों वैश्विक नेताओं के स्वागत सत्कार में बहुत ही सूक्ष्म लेकिन बड़ा अंतर दिखाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का हवाई अड्डे पर चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने औपचारिक स्वागत किया। वहीं दूसरी ओर रूसी राष्ट्रपति पुतिन की अगवानी के लिए खुद विदेश मंत्री वांग यी हवाई अड्डे पर मौजूद थे।
वांग यी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बेहद वरिष्ठ नेता और पोलित ब्यूरो के रसूखदार सदस्य हैं। वैश्विक मामलों के विश्लेषक इस प्रोटोकॉल के अंतर को बहुत महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनके अनुसार यह स्वागत प्रक्रिया रूस के साथ चीन के लगातार बढ़ते गहरे संस्थागत विश्वास को साफ तौर पर रेखांकित करती है।
ट्रंप से सतर्कता और पुतिन से दिखी गर्मजोशी
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान पूरी तरह सावधानी और सतर्कता बरती। हालांकि ट्रंप ने बातचीत में शी चिनफिंग को अपना एक महान नेता और अच्छा दोस्त कहा। इसके बावजूद दोनों महाशक्तियों के बीच हुई आधिकारिक चर्चा पूरी तरह नपे-तुले अंदाज में आगे बढ़ी।
शी चिनफिंग ने ट्रंप को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि चीन और अमेरिका को साझेदार होना चाहिए, प्रतिद्वंद्वी नहीं। उन्होंने बैठक के दौरान ताइवान जलडमरूमध्य और बढ़ते रणनीतिक तनाव जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई। अमेरिकी खेमे के साथ बातचीत का यह लहजा पूरी तरह औपचारिक बना रहा।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ दिखा अटूट भरोसा
इसके ठीक उलट रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के दौरान शी चिनफिंग का स्वर काफी गर्मजोशी से भरा था। चीनी राष्ट्रपति ने बीजिंग और मॉस्को के आपसी संबंधों को पूरी तरह अटूट बताया। उन्होंने वैश्विक अराजकता के बीच इस दोस्ती को दुनिया में शांति का एक मजबूत बल कहा।
पुतिन ने भी चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को अपना सबसे प्रिय मित्र कहकर संबोधित किया। उन्होंने एक मशहूर चीनी मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए अपनी गहरी दोस्ती का इजहार किया। पुतिन ने कहा कि हमारे लिए चीन से एक दिन भी अलग रहना तीन शरद ऋतुओं के बीत जाने जैसा लगता है।
Author: Pallavi Sharma


