Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। SEHB सोसायटी के करीब 900 सफाई कर्मचारियों ने शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। प्रशासन द्वारा ‘एस्मा’ (ESMA) लागू किए जाने के बावजूद कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कर्मचारियों की मांग है कि उनका काटा गया 10 प्रतिशत भत्ता बहाल किया जाए। साथ ही वे सरकारी तर्ज पर 4-9-14 वेतनमान लागू करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। आंदोलनकारी कर्मचारियों के अनुसार, उन्होंने हड़ताल पर जाने से पहले 14 दिन का उचित कानूनी नोटिस दिया था। इसके बावजूद अधिकारियों ने संवाद के बजाय पाबंदियां लगाने का रास्ता चुना। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि वे प्रशासन की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं, लेकिन अपने अधिकारों के लिए समझौता नहीं करेंगे।
प्रशासन ने लगाया एस्मा, फिर भी थमा कचरा प्रबंधन
पर्यटन सीजन के चरम पर होने के कारण जिला प्रशासन ने हिमाचल प्रदेश आवश्यक सेवा अधिनियम, 1973 लागू किया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आदेश जारी कर कचरा संग्रहण कार्य में किसी भी तरह की बाधा डालने पर रोक लगाई थी। प्रशासन का तर्क है कि कचरा न उठने से शहर में महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, कर्मचारियों ने इस सरकारी आदेश को दरकिनार करते हुए काम पूरी तरह बंद कर दिया है।
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने निगम प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में करीब 30 बैठकें हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। मेहरा का दावा है कि जब शहर में हाउस टैक्स और अन्य शुल्क बढ़ाए जा रहे हैं, तो कर्मचारियों के वेतन भत्तों में कटौती करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
आंदोलन की तपिश अब शिमला के अन्य महत्वपूर्ण सेक्टरों तक पहुंचने की संभावना है। यदि जल्द ही समझौता नहीं हुआ, तो अस्पतालों, होटलों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। शिमला में साल 2010 से SEHB सोसायटी घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा करने का जिम्मा संभाल रही है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ सकता है।
कर्मचारी नेता जसवंत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 900 परिवारों की रोजी-रोटी इसी वेतन पर टिकी है। प्रशासन ने बिना कोरम के बैठक कर वेतन कटौती का फैसला लिया, जो गैर-कानूनी है। अब यह लड़ाई आर-पार की हो चुकी है। दूसरी ओर, प्रशासन ने सख्ती बरतने के संकेत दिए हैं। ड्यूटी पर न लौटने वाले कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिससे टकराव और बढ़ने के आसार हैं।

