New Delhi News: खगोलीय घटनाओं के लिहाज से मई 2026 का महीना पूरी दुनिया के लिए बेहद खास होने वाला है। इस महीने अंतरिक्ष में कई दुर्लभ नजारे एक साथ दिखाई देंगे। सबसे बड़ी घटना यह है कि इस एक ही महीने में दो पूर्णिमा पड़ रही हैं। पहली पूर्णिमा 1 मई को ‘फ्लावर मून’ के रूप में दिखेगी, जबकि 31 मई की रात को होने वाली दूसरी पूर्णिमा को ‘ब्लू मून’ कहा जाएगा। खगोल विज्ञान में एक ही महीने में दो पूर्णिमा होने की घटना काफी रोमांचक मानी जाती है।
मई की दूसरी पूर्णिमा को क्यों कहा जाता है ‘ब्लू मून’?
जब एक ही कैलेंडर माह में दो बार पूर्णिमा आती है, तो दूसरी पूर्णिमा को ‘ब्लू मून’ की संज्ञा दी जाती है। यह नाम केवल एक परंपरा है, चंद्रमा का रंग वास्तव में नीला नहीं होता। मई 2026 का यह ब्लू मून एक ‘माइक्रो मून’ भी होगा। इसका मतलब है कि चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर (अपभू) बिंदु पर होगा। इसके कारण यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 12 से 14 प्रतिशत छोटा और थोड़ा कम चमकदार दिखाई देगा।
विभिन्न संस्कृतियों में चंद्रमा के अनोखे नाम
मई की पूर्णिमा को दुनिया भर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उत्तरी अमेरिका की जनजातियां इसे ‘फ्लावर मून’ कहती हैं क्योंकि इस समय प्रकृति में फूल खिलते हैं। इसे ‘कलियों वाला चांद’ या ‘बुवाई वाला चांद’ भी कहा जाता है। खगोलविदों के अनुसार, इन नामों की शुरुआत पूर्वी कनाडा के अल्गोक्विन लोगों ने की थी। डकोटा और लकोटा जनजातियों के लिए यह नई फसल की बुवाई का समय होता था, इसलिए उनके लिए यह एक सांस्कृतिक प्रतीक भी है।
आसमान में दिखेगी ग्रहों की परेड और उल्का बौछार
मई के मध्य, यानी 15-16 मई के आसपास अंतरिक्ष प्रेमी ‘ग्रहों की परेड’ देख सकेंगे। इस दौरान बुध, शुक्र और बृहस्पति ग्रह शाम के समय एक कतार में दिखाई देंगे। इसके अलावा, 5 मई की भोर में ‘एटा एक्वेरिड’ उल्का पिंडों की बौछार भी देखने को मिलेगी। हालांकि, चंद्रमा की रोशनी के कारण उल्काओं की दृश्यता थोड़ी प्रभावित हो सकती है, लेकिन अंधेरे स्थानों से यह नजारा साफ दिखेगा। मई महीने में चंद्रमा समय-समय पर मंगल, शनि और बुध के बेहद करीब से भी गुजरेगा।
एंटारेस तारे के पास दिखाई देगा ब्लू मून
31 मई को दिखने वाला ब्लू मून आकाश में वृश्चिक तारामंडल के सबसे चमकीले तारे ‘एंटारेस’ (Antares) के पास अपनी चमक बिखेरेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्लू मून की यह स्थिति हर दो से तीन साल के अंतराल पर बनती है। जवाहर तारामंडल की रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान चंद्रमा का आकार छोटा होने के बावजूद इसकी 16 कलाएं इसे शुभ और ऊर्जा का प्रतीक बनाती हैं। खगोल प्रेमियों के लिए यह महीना किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होगा।


