पश्चिम एशिया युद्ध का विमानन क्षेत्र पर कहर: क्या भारत में बंद हो जाएंगी एअर इंडिया और इंडिगो की उड़ानें?

New Delhi News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष ने भारतीय विमानन क्षेत्र को ढहने की कगार पर खड़ा कर दिया है। एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी दिग्गज कंपनियों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि वे जल्द ही परिचालन बंद कर सकती हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआइए) ने मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईंधन पर भारी टैक्स ने एयरलाइंस की कमर तोड़ दी है। अब उड़ानें जारी रखना असंभव हो रहा है।

विमानन कंपनियों ने दी परिचालन ठप करने की बड़ी चेतावनी

घरेलू विमानन कंपनियों के संगठन एफआइए ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को आगाह किया है कि अगर तुरंत राहत नहीं मिली तो उड़ानें रद करनी पड़ेंगी। विमानन इतिहास में यह पहली बार है जब प्रमुख कंपनियों ने एक साथ हाथ खड़े करने की बात कही है। पश्चिम एशिया युद्ध के चलते एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया है। इसके कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बीच भारी असमानता पैदा हो गई है, जिससे पूरा नेटवर्क अलाभकारी हो चुका है।

एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल और नेटवर्क का संकट

अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिचालन में एटीएफ की कीमत 73 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर से उछलकर 118 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें 260 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंची हैं। यह लगभग 295 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि है। कच्चे तेल और एटीएफ की कीमतों का अंतर यानी क्रैक स्प्रेड भी 132 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, जो पहले बहुत कम था।

ईंधन खर्च ने बिगाड़ा एयरलाइंस का पूरा बजट गणित

आमतौर पर किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी 30 से 40 प्रतिशत के बीच होती है। हालांकि मौजूदा संकट के बाद यह खर्च बढ़कर 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसके अलावा भारतीय रुपये की कमजोरी ने विमानन कंपनियों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं। एफआइए ने मांग की है कि सरकार 11 प्रतिशत उत्पाद शुल्क को तुरंत निलंबित करे। साथ ही क्रैक बैंड फार्मूले को बहाल किया जाए ताकि तेल कंपनियों का मार्जिन कंपनियों पर भारी न पड़े।

प्रमुख शहरों में वैट की दरों से बढ़ा वित्तीय बोझ

दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ईंधन पर लगने वाला भारी वैट एयरलाइंस को घाटे में धकेल रहा है। दिल्ली में जेट फ्यूल पर 25 प्रतिशत और तमिलनाडु में 29 प्रतिशत वैट वसूला जा रहा है। मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे बड़े केंद्रों में भी यह 16 से 20 प्रतिशत के बीच है। इन छह प्रमुख शहरों से ही देश की आधे से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। कंपनियों का कहना है कि अगर वैट कम नहीं हुआ तो कनेक्टिविटी घटाना मजबूरी होगी।

वैश्विक विमानन संकट और हजारों उड़ानें हुई रद

ईरान युद्ध के प्रभाव के कारण दुनिया भर की विमानन कंपनियां इस समय गहरे संकट का सामना कर रही हैं। मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान पश्चिम एशिया से संबंधित 60,000 से अधिक उड़ानें रद हो चुकी हैं। एअर इंडिया ने भी हजारों उड़ानें रद की हैं। एमिरैट्स, कतर एयरवेज और एतिहाद जैसी कंपनियों ने भी अपना परिचालन 40 से 60 प्रतिशत तक घटा दिया है। लुफ्तहांसा और सिंगापुर एयरलाइंस जैसी कंपनियों ने भी कई संवेदनशील रूट बंद कर दिए हैं।

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