बरेली में ‘लेडी डॉन’ का कारनामा: फर्जी IAS बनकर कार पर लिखवाया ADM और बेरोजगारों को लगाया 11 लाख का चूना

Bareilly News: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला खुद को फर्जी आईएएस (IAS) अफसर बताकर लोगों को ठगी का शिकार बना रही थी। कभी एसडीएम तो कभी एडीएम बनकर रौब झाड़ने वाली इस शातिर महिला और उसकी सगी बहन को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पकड़ी गई महिला अपनी निजी कार पर ‘एडीएम एफआर’ लिखवाकर घूमती थी, ताकि लोग उसे असली प्रशासनिक अधिकारी समझें। पुलिस मंगलवार को इन आरोपियों को जेल भेजेगी।

सरकारी नौकरी के नाम पर 4 लोगों से की बड़ी वसूली

पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर अब तक चार निर्दोष लोगों से करीब 11 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली है। फाइक एन्क्लेव की रहने वाली प्रीति लायल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2022 में उसकी मुलाकात शिखा पाठक नाम की महिला से हुई थी। शिखा ने अपनी बहन डॉ. विप्रा शर्मा का परिचय एक रसूखदार ‘एसडीएम’ के रूप में कराया और दावा किया कि वह सीधे सरकारी नियुक्तियां करवा सकती है।

यूपीएसएसएससी में कंप्यूटर ऑपरेटर बनाने का दिया झांसा

आरोपी शिखा और विप्रा ने प्रीति को झांसा दिया कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती होनी है। इस जाल में फंसकर प्रीति ने अपने तीन अन्य साथियों—आदिल खान, मुशाहिद अली और संतोष के साथ मिलकर आरोपियों से संपर्क किया। ग्रेटर ग्रीन पार्क स्थित आवास पर हुई मुलाकात के दौरान आरोपियों ने नौकरी का पक्का भरोसा दिया और बदले में लाखों रुपये की मांग की, जिसे पीड़ितों ने सच मानकर सौंप दिया।

फर्जी हस्ताक्षर और शासन के जाली दस्तावेज किए तैयार

ठगी की हद तब पार हो गई जब डॉ. विप्रा शर्मा ने पीड़ितों को बाकायदा नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) भी सौंप दिए। ये पत्र राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश के फर्जी लेटरहेड पर तैयार किए गए थे, जिन पर शासन की वरिष्ठ अधिकारी मनीषा त्रिघाटिया के फर्जी हस्ताक्षर मौजूद थे। जब पीड़ितों ने इन दस्तावेजों की विभाग में जांच करवाई, तब जाकर इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। बारादरी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों बहनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली।

गिरोह में अन्य सदस्यों के शामिल होने की आशंका

सोमवार को बारादरी पुलिस ने दोनों बहनों के साथ एक अन्य संदिग्ध को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस को संदेह है कि यह एक संगठित गिरोह है जो भोले-भले युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर ठगता है। एडीएम की नेमप्लेट वाली कार और फर्जी आईडी कार्ड्स के जरिए इन्होंने इलाके में काफी दबदबा बना रखा था। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा ठगे गए अन्य संभावित पीड़ितों की तलाश कर रही है।

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