90 करोड़ की ड्रग्स, आधी रात को मुठभेड़ और रेंगते हुए पहुंची पुलिस: ‘ऑपरेशन विषग्रहण’ की पूरी कहानी

Rajasthan News: राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े अभियान ‘ऑपरेशन विषग्रहण’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। जोधपुर-जैसलमेर हाईवे के पास बालेसर में एक सुनसान खेत में चल रही विशाल एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस दौरान पुलिस और तस्करों के बीच जोरदार फायरिंग हुई। पुलिस ने मौके से 90 करोड़ रुपये मूल्य की 176 किलो एमडी ड्रग्स बरामद की है। साथ ही गिरोह के सरगना हापू राम सहित छह खूंखार तस्करों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

शातिर तस्करों को पकड़ने के लिए कमांडो ने रची व्यूह रचना

इस गिरोह के सदस्य बेहद आधुनिक और शातिर थे। ये पकड़े जाने से बचने के लिए केवल iPhone का उपयोग करते थे। मोबाइल टावर ट्रैकिंग से बचने के लिए वे केवल एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया ऐप्स पर ही बात करते थे। पुलिस को इनकी भनक तब लगी जब ड्रग्स बनाने के मुख्य घटक ‘आइस’ की सप्लाई चेन का सुराग मिला। करीब डेढ़ महीने की कड़ी निगरानी के बाद 25 अप्रैल की आधी रात को ANTF के कमांडो ने बालेसर के सुनसान इलाके में धावा बोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया।

3 घंटे रेंगकर पहुंचे जवान और फिर शुरू हुई ताबड़तोड़ फायरिंग

तस्करों की फैक्ट्री आबादी से दूर एक ऊंचे ढांचे में स्थित थी, जहां से चारों ओर नजर रखी जा सकती थी। पुलिस को भनक लगने से बचाने के लिए कमांडो करीब तीन घंटे तक जमीन पर रेंगकर फैक्ट्री के करीब पहुंचे। घेराबंदी के बाद जब सरेंडर करने को कहा गया, तो सरगना हापू राम और सुरक्षा प्रभारी अर्जुन ने छत से फायरिंग शुरू कर दी। दोनों तरफ से लगभग 15 राउंड गोलियां चलीं। पुलिस ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए तस्करों को चारों तरफ से घेर लिया।

छत से कूदा सरगना, टांग टूटी और विदेशी पिस्तौल बरामद

घेराबंदी सख्त होते देख हापू राम और अर्जुन ने छत से कूदकर भागने की कोशिश की। कूदने के दौरान हापू राम की टांग टूट गई, जिससे वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने अर्जुन को भी दबोच लिया और उसके पास से एक विदेशी पिस्तौल की नकल बरामद की। अंधेरे का फायदा उठाकर भाग रहे चार अन्य आरोपियों को भी कमांडो ने अपनी गिरफ्त में ले लिया। पुलिस को मौके पर भारी मात्रा में एमडी ड्रग्स मिली, जिसे सुखाकर बाजार में भेजने की तैयारी चल रही थी।

हैदराबाद जेल से निकले अपराधी चला रहे थे हाईटेक नेटवर्क

इस गिरोह का ढांचा काफी व्यवस्थित था। सरगना हापू राम ने पुराने जेल साथियों को मिलाकर यह नेटवर्क बनाया था। गिरोह में शामिल नरेश मुख्य केमिस्ट था, जबकि नरेंद्र प्रोडक्शन का जिम्मा संभाल रहा था। नरेंद्र इससे पहले हैदराबाद जेल में रह चुका था और उसे ड्रग्स बनाने का गहरा अनुभव था। अर्जुन फैक्ट्री की सुरक्षा देखता था। यह पूरी फैक्ट्री अर्जुन के चाचा जिया राम के मकान में चल रही थी। जिया राम ने मामूली किराए वाले मकान को गिरोह को ढाई लाख रुपये में दिया था।

गुजरात से पंजाब तक फैला था मौत का यह कारोबार

जांच में सामने आया कि ड्रग्स बनाने का कच्चा माल गुजरात और महाराष्ट्र से आता था। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों जोधपुर, बाड़मेर और जालौर के सुनसान इलाकों में इसे तैयार किया जाता था। तैयार माल को गुजरात के रास्ते दक्षिण भारत और बीकानेर के जरिए पंजाब एवं उत्तर भारत में सप्लाई किया जाता था। राजस्थान में पिछले एक साल में 33 एमडी ड्रग फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी फरार सदस्यों और फंडिंग नेटवर्क की तलाश में जुटी हुई है।

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories