St. Petersburg News: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों की वित्तीय नीतियों पर बहुत तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पूरी दुनिया अब अमेरिकी डॉलर और यूरो पर अपनी आर्थिक निर्भरता को बहुत तेजी से कम कर रही है।
सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (SPIEF) 2026 में बोलते हुए रूसी राष्ट्रपति ने कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और रूसी संपत्तियों को अवैध तरीके से फ्रीज करने की वजह से यह बड़ा बदलाव आ रहा है।
वैश्विक वित्तीय प्रणालियों पर से टूट रहा है दुनिया का भरोसा
पुतिन ने कहा कि जब किसी भी संप्रभु देश की वैध संपत्तियों को मनमाने ढंग से रोका जा सकता है, तो दूसरे देश भी अपने वित्तीय भविष्य को लेकर डर जाते हैं। इसी कारण से दुनिया भर में वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
रूस अब अपने प्रमुख व्यापारिक सहयोगियों के साथ अपनी राष्ट्रीय मुद्रा में लेन-देन को लगातार बढ़ा रहा है। राष्ट्रपति पुतिन के अनुसार रूस के कुल निर्यात का लगभग 65% व्यापार अब रूसी रूबल (Russian Ruble) में ही सफलतापूर्वक किया जा रहा है।
इसके साथ ही डिजिटल वित्तीय परिसंपत्तियों और केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का चलन भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। पुतिन ने आरोप लगाया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने वैश्विक मंच से की भारत की खुलकर तारीफ
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को ब्रिक्स (BRICS) संगठन का एक बेहद मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ बताया है। उन्होंने कहा कि भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उद्योग में पूरी दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है। ग्लोबल सॉफ्टवेयर मार्केट में उसकी बहुत बड़ी हिस्सेदारी है।
उन्होंने भारत को रूस का एक भरोसेमंद रणनीतिक और आर्थिक साझेदार बताया। पुतिन ने मंच पर भारतीय प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार का केंद्र अब पश्चिम से पूरी तरह हटकर पूर्व और दक्षिण के देशों की ओर बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
रूसी राष्ट्रपति ने अपने नए व्यापारिक मार्गों का विशेष उल्लेख किया। इन प्रमुख आर्थिक गलियारों में मुख्य रूप से नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, ट्रांस-आर्कटिक रूट, कैस्पियन सागर व्यापार मार्ग और मध्य एशिया को जोड़ने वाले कई नए कॉरिडोर पूरी तरह शामिल हैं।
आर्थिक मोर्चे पर ब्रिक्स देशों ने जी7 को बहुत पीछे छोड़ा
पुतिन ने आर्थिक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वैश्विक जीडीपी (GDP) में ब्रिक्स देशों की कुल हिस्सेदारी लगभग 40% तक पहुंच चुकी है। इसके मुकाबले विकसित देशों के संगठन जी7 (G7) की हिस्सेदारी अब घटकर केवल 29% से भी नीचे आ गई है।
पिछले पांच सालों में दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में 49% योगदान अकेले ब्रिक्स देशों का रहा है। इसी अवधि में जी7 देशों का योगदान महज 18% दर्ज किया गया। ब्रिक्स ने साल 2020 में ही जी7 को आर्थिक ताकत में पीछे छोड़ दिया था।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक व्यापार में डॉलर की बादशाहत को चुनौती जरूर मिल रही है। हालांकि डॉलर अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी बनी हुई है। पुतिन का बयान इस बड़े बदलाव की पुष्टि करता है, पर डॉलर का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
Author: Pallavi Sharma


