Washington News: अमेरिकी संसद में एच-1बी (H-1B) वीजा कार्यक्रम में बहुत बड़े फेरबदल की तैयारी चल रही है। संसद में एक नया सख्त विधेयक पेश किया गया है। इसके जरिए विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने के नियमों को कड़ा करने और न्यूनतम वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस खतरनाक विधेयक के कानून बनने पर भारतीय आईटी कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों पर सबसे ज्यादा बुरा असर पड़ सकता है। टेक्सास से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद चिप रॉय ने अमेरिकी संसद में ‘अमेरिकन व्हाइट-कॉलर वर्कर जॉब्स एक्ट ऑफ 2026’ बिल पेश किया है।
विदेशी टेक कंपनियों पर भारी पड़ेगा नया अमेरिकी कानून
सांसद चिप रॉय ने दावा किया कि पिछले 40 सालों में विदेशी कंपनियों ने एच-1बी वीजा का जमकर दुरुपयोग किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियां अमेरिकी प्रोफेशनल्स की जगह दूसरे देशों के सस्ते विदेशी कर्मियों को रख रही हैं। इस वजह से स्थानीय योग्य युवाओं को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं।
यह नया विधेयक ऐसे समय में पेश हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन आप्रवासन नीतियों पर लगातार कड़ा रुख अपना रहा है। इस बिल में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली शर्त यह है कि वीजा धारकों को साबित करना होगा कि उनका स्थायी घर अमेरिका से बाहर है।
पूरी तरह खत्म हो जाएगी पुरानी ड्यूल इंटेंट व्यवस्था
ग्लोबल इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स के अनुसार इस कठोर नियम के लागू होते ही दशकों पुरानी ‘ड्यूल इंटेंट’ (Dual Intent) व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अब तक एच-1बी वीजा रखने वाले तकनीकी कर्मचारी अमेरिका में काम करने के दौरान ही स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड के लिए भी आवेदन कर सकते थे।
इसके अलावा किसी विदेशी को नौकरी पर रखने से पहले अमेरिकी कंपनियों को यह ठोस सबूत देना होगा कि उन्हें स्थानीय स्तर पर कोई लायक कर्मचारी नहीं मिला। कंपनियों को अब एक सरकारी पोर्टल पर नौकरी से जुड़ा अनिवार्य विज्ञापन भी देना पड़ेगा।
नियमों के मुताबिक यदि किसी अमेरिकी नागरिक के पास विदेशी प्रोफेशनल के बराबर या उससे अधिक योग्यता है, तो कंपनी को पहले उसे नौकरी देनी होगी। यह विधेयक ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान वीजा अवधि बढ़ाने के प्रावधानों को भी खत्म कर देगा।
वीजा की अधिकतम समय सीमा छह साल से घटकर हुई दो साल
इस खतरनाक कानून में एच-1बी वीजा की अधिकतम समय सीमा को छह साल से घटाकर केवल दो साल करने का प्रस्ताव है। एरिजोना से रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन इस बिल के सह-प्रायोजक हैं। इस नए बदलाव से अमेरिका में रह रहे लाखों भारतीय इंजीनियरों के बीच चिंता बढ़ गई है।
इस भारी तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सभी मामलों में वीजा कानूनों को निष्पक्ष और एकसमान रूप से लागू कर रही है। इसके जरिए भारत को निशाना बनाने का कोई मकसद नहीं है।
अमेरिकी गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन की सख्ती के बाद जून और जुलाई 2025 में भारतीय छात्रों को जारी होने वाले वीजा में 69 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इस नए कानून के आने के बाद अब रोजगार के अवसरों पर भी बड़ा संकट मंडरा रहा है।
Author: Pallavi Sharma


