ईरान में 48 घंटे तक मौत से जंग! हाथ में सिर्फ एक पिस्तौल और पीछे पड़ी पूरी फौज, कैसे बचा अमेरिकी पायलट?

World News: ईरान में एक अमेरिकी पायलट ने मौत को मात देकर सुरक्षित वापसी की है। विमान क्रैश होने के बाद वह पायलट दुश्मन के इलाके में अड़तालीस घंटे तक फंसा रहा। उसके पास अपनी रक्षा के लिए केवल एक पिस्तौल थी। पूरी ईरानी फौज उसकी तलाश में चप्पे-चप्पे पर तैनात थी। लेकिन अमेरिका ने एक बेहद गुप्त और साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे सुरक्षित निकाल लिया। इस पूरी घटना ने दुनिया भर को हैरत में डाल दिया है।

दुश्मन के गढ़ में अड़तालीस घंटे तक छिपा रहा पायलट

अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान की सीमा के भीतर अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान गिरने से पहले ही पायलट इजेक्ट करने में सफल रहा। जमीन पर गिरते ही उसने खुद को एक सुरक्षित जगह पर छिपा लिया। उसके पास कोई भारी हथियार नहीं था। उसके पास सिर्फ एक छोटी पिस्तौल और लोकेशन बताने वाला एक उपकरण मौजूद था। उसने लगातार दो दिन तक बिना खाए-पिए खुद को दुश्मनों की नजरों से बचाए रखा।

ईरानी सेना का कड़ा पहरा और तलाश अभियान

ईरानी सेना को अमेरिकी विमान गिरने की भनक लग चुकी थी। उन्होंने पायलट को जिंदा पकड़ने के लिए एक बहुत बड़ा सर्च अभियान शुरू कर दिया। पूरे इलाके की कड़ी घेराबंदी कर दी गई थी। आसमान में ड्रोन और हेलीकॉप्टर लगातार गश्त कर रहे थे। सैनिक खोजी कुत्तों के साथ जंगलों और पहाड़ों को छान रहे थे। पायलट हर पल मौत के साये में जी रहा था। एक छोटी सी गलती उसकी जान ले सकती थी।

रेस्क्यू टीम से संपर्क और बचाव की रणनीति

संकट की इस घड़ी में पायलट ने हार बिल्कुल नहीं मानी। उसने अपने पास मौजूद सुरक्षित संचार प्रणाली का बड़ी सावधानी से इस्तेमाल किया। उसने अमेरिकी कमांड सेंटर को अपनी सटीक लोकेशन की जानकारी भेज दी। सिग्नल मिलते ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में खलबली मच गई। पायलट को बचाने के लिए तुरंत एक खास रेस्क्यू मिशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। इस गुप्त अभियान की जिम्मेदारी सबसे बेहतरीन अमेरिकी कमांडो टीम को सौंपी गई।

आधी रात को हुआ सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिकी कमांडो रात के घने अंधेरे में ईरानी सीमा में दाखिल हुए। उन्होंने बेहद कम ऊंचाई पर विशेष हेलीकॉप्टर उड़ाए ताकि रडार से बच सकें। वे सीधे पायलट की छिपी हुई लोकेशन पर पहुंचे। कमांडो टीम ने पलक झपकते ही पायलट को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया। ईरानी सैनिकों को जब तक भनक लगती तब तक रेस्क्यू टीम वहां से निकल चुकी थी। डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन बताया है।

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