ओमान के नाम पर बांग्लादेश में खप रही थी ईरानी एलपीजी, अमेरिका ने ‘शैडो फ्लीट’ और शेल कंपनियों पर लगाया कड़ा प्रतिबंध

World News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब एक बड़े वैश्विक आर्थिक युद्ध में बदल गया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के एक बहुत बड़े और कथित एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) नेटवर्क पर व्यापक प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह नेटवर्क चोरी-छिपे एशियाई देशों में कारोबार कर रहा था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आरोप है कि यह नेटवर्क ईरानी मूल की एलपीजी गैस को ओमान के ईंधन के रूप में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पेश कर रहा था। ओमान का नाम इस्तेमाल कर इस प्रतिबंधित गैस को बांग्लादेश सहित दक्षिण और पूर्वी एशिया के कई प्रमुख देशों तक पहुंचाया जा रहा था।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ के तहत की कार्रवाई

अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने इस बड़ी कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा की है। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह कार्रवाई ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य ईरान के अवैध व्यापारिक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है।

प्रतिबंधों का नया दायरा उन सभी वैश्विक कंपनियों, समुद्री जहाजों और व्यक्तियों तक बढ़ाया गया है, जो ईरान पर लगे कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने में मदद कर रहे थे। अमेरिका ने साफ किया है कि वह ईरान के अवैध राजस्व स्रोतों पर कड़ा प्रहार जारी रखेगा।

यूएई और चीन की फ्रंट कंपनियों का हुआ भंडाफोड़

अमेरिकी जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे खेल में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और चीन में स्थापित कई फ्रंट (शेल) कंपनियों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय जांच से बचने के लिए कई विदेशी बैंक खातों और ईरान के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ (अवैध जहाजों का बेड़ा) का सहारा लिया।

इन जहाजों के जरिए समुद्र के बीच में एलपीजी की वास्तविक उत्पत्ति और उसके स्रोत को पूरी तरह छिपा दिया जाता था। अमेरिका ने इस नेटवर्क से जुड़े कई गैस टैंकरों और फर्जी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है, जिन्होंने अकेले बांग्लादेश में करोड़ों डॉलर की अवैध एलपीजी सप्लाई की थी।

ईरानी विदेशी मुद्रा विनिमय कंपनी पर भी लगा बैन

एलपीजी नेटवर्क के साथ-साथ अमेरिका ने एक बड़ी ईरानी विदेशी मुद्रा विनिमय (एक्सचेंज) कंपनी ‘मेहरदाद गेरामियन निक एंड पार्टनर्स’ पर भी कड़ा प्रतिबंध लगाया है। इस कंपनी पर प्रतिबंधित ईरानी सरकारी बैंकों की तरफ से सैकड़ों करोड़ डॉलर के अवैध वित्तीय लेन-देन को अंजाम देने का गंभीर आरोप है।

वाशिंगटन का कहना है कि ईरान का पूरा वित्तीय ढांचा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को बाईपास करने के लिए विदेशी दलालों पर निर्भर है। अमेरिकी प्रशासन ने सख्त लहजे में संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली का दुरुपयोग करने वाले ऐसे सभी संदिग्ध नेटवर्कों के खिलाफ आगे भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

Author: Pallavi Sharma

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