Islamabad News: मध्य पूर्व के आसमान में इन दिनों बारूद की गंध है। अमेरिका और ईरान के बीच एक भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है। इस बीच पाकिस्तान ने खुद को एक शांति दूत के रूप में पेश किया है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी शांति वार्ता नहीं हो रही है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान के जरिए एक अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। अमेरिका ने युद्ध रोकने के लिए 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव दिया है। ईरान की सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।
पाकिस्तान के जरिए अमेरिका ने भेजा संदेश
इशाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पूरे मामले की सच्चाई बताई। उन्होंने मीडिया में चल रही सीधी बातचीत की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। डार ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेश पहुंचाने का काम इस्लामाबाद कर रहा है। यह पहला मौका है जब पाकिस्तान ने अपनी इस भूमिका को आधिकारिक तौर पर कबूल किया है। इस तनावपूर्ण माहौल में कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। पाकिस्तान की कोशिश है कि इस पूरे क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल हो सके।
तुर्किए, मिस्र और सऊदी अरब का मिला साथ
पाकिस्तान इस शांति प्रयास में अकेला नहीं है। इशाक डार के मुताबिक तुर्किए, मिस्र और सऊदी अरब जैसे मित्र देश भी इस पहल का पूरा समर्थन कर रहे हैं। इन देशों के विदेश मंत्री आगे की रणनीति तय करने के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। यहां वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ एक अहम बैठक करेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में तनाव को कम करना है। हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और शहबाज शरीफ के बीच भी फोन पर इसी मुद्दे को लेकर लंबी बातचीत हुई है।
क्या ईरान मानेगा अमेरिका की शर्तें?
अमेरिका का 15 सूत्रीय प्रस्ताव युद्ध रोकने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है। हालांकि, ईरान ने अभी तक इस पर अपनी कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है। दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी हो चुकी है। अमेरिका लगातार सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिखता। अब दुनिया भर की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान की यह कूटनीति रंग लाएगी या युद्ध का दायरा और अधिक बढ़ेगा।


