Kabul News: पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात शहर में तालिबान प्रशासन का बेहद क्रूर और खौफनाक चेहरा सामने आया है। यहां ड्रेस कोड (हिजाब नियम) के कथित उल्लंघन के आरोप में महिलाओं की गिरफ्तारी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के लिए तालिबान ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं।
चश्मदीदों के मुताबिक, सड़कों पर उतरीं निहत्थी महिलाओं और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए तालिानी पुलिस ने सरेआम अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस अचानक हुई फायरिंग में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस हिंसक कार्रवाई के बाद से पूरे हेरात शहर में दहशत और तनाव का माहौल है।
दर्जन भर महिलाओं को किया था गिरफ्तार
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब तालिबान के नैतिकता मंत्रालय ने निर्धारित ड्रेस कोड का पालन नहीं करने का आरोप लगाकर एक दर्जन से अधिक महिलाओं को हिरासत में ले लिया। इस एकतरफा और दमनकारी कार्रवाई के विरोध में हेरात की करीब 100 से 150 साहसी महिलाएं और नागरिक सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शनकारी महिलाएं अपनी आजादी और साथियों की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगा रही थीं। अफगानिस्तान में तालिबान शासन की वापसी के बाद से इस तरह के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन बेहद दुर्लभ माने जाते हैं। कड़े पहरे और खौफ के बावजूद महिलाओं का यह गुस्सा तालिबानी तानाशाही के खिलाफ बड़ा विद्रोह माना जा रहा है।
कड़े प्रतिबंधों से नरक बनी जिंदगी
साल 2021 में अमेरिकी नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेनाओं की वापसी के बाद अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान ने बंदूक के दम पर कब्जा कर लिया था। सत्ता में आते ही तालिबान ने इस्लामी कानून (शरिया) की अपनी बेहद सख्त और कट्टर व्याख्या के आधार पर आम जनता, विशेषकर महिलाओं पर कई अमानवीय नियम थोप दिए हैं।
तालिबान शासन ने अफगान महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी पर पूरी तरह से कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। लड़कियों के स्कूल और कॉलेज जाने पर पाबंदी है। अब इस नए हिजाब कानून और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों ने वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार संगठनों की चिंता को काफी बढ़ा दिया है।
Author: Pallavi Sharma


