West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस समय भारी भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार विपक्ष से कोई राजनीतिक प्रतिशोध या बदला नहीं ले रही है।
मुख्यमंत्री ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि राज्य की सीआईडी शाखा ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को कानूनी नोटिस भेजा है। यह कार्रवाई खुद तृणमूल कांग्रेस के ही दो बागी विधायकों की लिखित शिकायत के बाद शुरू की गई है।
टीएमसी विधायक रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा सचिवालय में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नियुक्त करने वाले पार्टी प्रस्ताव पर उनके जाली हस्ताक्षर किए गए थे।
इस बड़े खुलासे और मुख्यमंत्री के संवाददाता सम्मेलन के तुरंत बाद बौखलाई तृणमूल कांग्रेस आलाकमान ने दोनों विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी ने दोनों नेताओं को दल विरोधी गतिविधियों के संगीन आरोप में निष्कासित कर दिया है।
टीएमसी पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है, हमें प्रतिशोध की जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि कुछ विपक्षी नेताओं को यह कानूनी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध जैसी लग सकती है। हालांकि हम ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहते क्योंकि तृणमूल कांग्रेस एक राजनीतिक दल के रूप में अब पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है।
सांसद अभिषेक बनर्जी और अन्य टीएमसी नेताओं ने राज्य की भाजपा सरकार पर सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि सोमवार को सीआईडी के समक्ष पेश होने के नोटिस में सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
सीआईडी केवल इस कथित हाई-प्रोफाइल हस्ताक्षर जालसाजी मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। फलता सीट से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव से हटने की घटना पर मुख्यमंत्री ने तंज कसा।
उन्होंने कहा कि ऐन वक्त पर प्रत्याशी का मैदान छोड़ना यह साबित करता है कि टीएमसी का जमीनी संगठन खत्म हो चुका है। हस्ताक्षरों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए मुख्यमंत्री ने सीआईडी को भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
तबीयत खराब होने का हवाला देकर अभिषेक ने सीआईडी से मांगा और समय
मुख्यमंत्री अधिकारी ने बताया कि राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने उन्हें मौजूदा स्थिति की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को सीआईडी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए और अतिरिक्त समय मांगा है।
अभिषेक बनर्जी ने अपने वकीलों के माध्यम से खराब स्वास्थ्य और अन्य गंभीर समस्याओं का हवाला देकर समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समय देना या न देना पूरी तरह सीआईडी का विवेकाधिकार है।
शुभेंदु अधिकारी ने जांच की पूरी कड़ियों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि नौ मई को विधानसभा अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में अभिषेक बनर्जी ने वरिष्ठ नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नया नेता नियुक्त करने की मांग की थी।
इसके बाद 18 मई को विधानसभा के प्रधान सचिव ने अभिषेक बनर्जी से इस नियुक्ति के प्रस्ताव का पूरा विवरण मांगा था। जवाब में 20 मई को बनर्जी ने पार्टी के 70 विधायकों के हस्ताक्षरों वाला एक प्रस्ताव पत्र भेजा था।
चौदह विधायकों के हस्ताक्षर बड़े अक्षरों में थे, तीन ने कहा- ये हमारे नहीं
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राप्त प्रस्ताव पत्र में दस से अधिक विधायकों के नाम बड़े अक्षरों (कैपिटल लेटर्स) में लिखे गए थे। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने वास्तविक हस्ताक्षर कभी भी बड़े अक्षरों में नहीं करता है।
बागी विधायकों ने अध्यक्ष से शिकायत की कि छह मई को विपक्ष के नेता के चयन को लेकर ऐसी कोई बैठक या प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। इसके बाद अध्यक्ष के निर्देश पर पुलिस ने हरे स्ट्रीट थाने में प्राथमिकी दर्ज की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री के रूप में मुख्यमंत्री की मंजूरी से जांच सीआईडी को सौंपी गई। सीआईडी ने वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ 13 टीएमसी विधायकों से इस सिलसिले में बेहद कड़ी और लंबी पूछताछ की है।
सीआईडी ने फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए जाने-माने हस्तलेख विशेषज्ञों (हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स) की भी मदद ली है। पूछताछ के दौरान अरूप रॉय, बहारुल इस्लाम और सुभाशीष दास नामक तीन विधायकों ने साफ कह दिया कि यह उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
Author: Sourav Banerjee


