Washington News: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर युद्ध के बादल काफी गहरे हो गए हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद खतरनाक योजना बनाई है। यह योजना ईरान के साथ होने वाले संभावित युद्ध से जुड़ी है। ट्रंप अरब देशों को उनका ही खजाना खाली करने की राह पर धकेल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अरब मुल्कों के साथ एक बहुत बड़ा धोखा साबित हो सकता है।
अरब देशों की सुरक्षा की आड़ में खजाना लूटने की तैयारी
डोनाल्ड ट्रंप का यह नया राजनीतिक दांव पूरी दुनिया को चौंका रहा है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देश अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं। अमेरिका इसी डर का सीधा फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन के समय से ही ‘सुरक्षा के बदले पैसा’ वाली नीति हमेशा चर्चा में रही है। अब एक बार फिर से अरब देशों के खजाने को निशाना बनाया जा रहा है। हथियारों की बिक्री और सैन्य सुरक्षा के नाम पर खाड़ी देशों से मोटी रकम वसूलने की पूरी योजना है।
ईरान के डर से खाली होंगे खाड़ी देशों के खजाने
ईरान का खौफ दिखाकर अमेरिका अरब देशों को अपने पाले में कर रहा है। इस सोची-समझी रणनीति के तहत अमेरिका उन्हें बेहद महंगे हथियार बेचेगा। इससे अमेरिका की अपनी अर्थव्यवस्था तो काफी मजबूत होगी। लेकिन अरब मुल्कों के खजाने पूरी तरह से खाली हो जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह कोई सच्ची दोस्ती नहीं है। यह एक पक्का और क्रूर व्यापारिक समझौता है। इसमें अरब देशों के असल हितों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। इस खतरनाक खेल का असली मकसद सिर्फ और सिर्फ अमेरिकी तिजोरी को भरना है।
विदेश नीति के नाम पर दुनिया का सबसे बड़ा धोखा
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे सीधे तौर पर एक बड़ा धोखा मान रहे हैं। अरब देशों ने हमेशा अमेरिका को अपना एक मजबूत साथी माना है। लेकिन ट्रंप की यह ‘खतरनाक योजना’ पूरी तरह से एकतरफा और स्वार्थी है। इसमें साथी देशों की आर्थिक मजबूती को पूरी तरह दांव पर लगा दिया गया है। अगर यह योजना वास्तव में लागू होती है, तो मिडिल ईस्ट में भारी राजनीतिक अस्थिरता फैल जाएगी। इससे भविष्य में अमेरिका और अरब देशों के रिश्तों में बहुत गहरी खटास आ सकती है।


