US News: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भयानक युद्ध ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस बार सबसे बड़ा खतरा मिसाइलों से नहीं बल्कि वाशिंगटन से आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादित सोशल मीडिया पोस्ट ने भूचाल ला दिया है। ट्रंप ने ईरान को नर्क में भेजने की सीधी धमकी दी है। इस भयानक बयान के बाद अमेरिका के अंदर ही उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सीनेटर उन्हें पूरी तरह असंतुलित बता रहे हैं।
ट्रुथ सोशल पर भड़के राष्ट्रपति ट्रंप
विवाद की असल शुरुआत राष्ट्रपति ट्रंप के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ से हुई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर ईरान को खुलेआम गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ट्रंप ने बहुत ही आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर तेल का रास्ता नहीं खुला तो ईरान के पावर प्लांट तबाह कर दिए जाएंगे। उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे और पुलों को मलबे में बदलने की खतरनाक धमकी देकर कूटनीतिक मर्यादाएं तोड़ दी हैं।
तेल की कीमतों में भारी उछाल
ट्रंप की इस आक्रामक भाषा ने दुनिया भर के तमाम राष्ट्राध्यक्षों को भारी हैरत में डाल दिया है। फरवरी महीने से यह भीषण युद्ध लगातार जारी है। इसके कारण होर्मुज का अहम व्यापारिक रास्ता पूरी तरह बंद पड़ा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ट्रंप ने अपने नाटो सहयोगियों को भी नहीं बख्शा है। उन्होंने खुले मंच से नाटो गठबंधन से बाहर निकलने की भयानक धमकी देकर पश्चिमी देशों में भारी दहशत फैला दी है।
दिग्गज नेताओं ने उठाए गंभीर सवाल
ट्रंप के इस आक्रामक रवैये पर उनके अपने ही देश में तीखा हमला हो रहा है। उनकी पूर्व सहयोगी मार्जरी टेलर ग्रीन ने प्रशासन से तुरंत दखल देने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रपति अब पागलपन की स्थिति में पहुंच चुके हैं। वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता चक शूमर ने भी कड़ा प्रहार किया है। शूमर ने ट्रंप के इन विवादित बयानों को एक विक्षिप्त व्यक्ति की बेतुकी और खतरनाक बकवास करार दिया है।
पुराने दोस्तों से दूर हो रहा अमेरिका
चक शूमर ने आगे चेतावनी दी है कि ट्रंप का यह बुरा बर्ताव अमेरिका के पुराने और वफादार दोस्तों को दूर कर रहा है। उन्होंने ट्रंप की धमकियों को सीधे तौर पर युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है। अमेरिका की आंतरिक राजनीति में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है। विपक्षी दल लगातार व्हाइट हाउस पर दबाव बना रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे गैर जिम्मेदाराना बयानों से देश की कूटनीतिक गरिमा पूरी तरह से तार-तार हो गई है।
संविधान के 25वें संशोधन की मांग
यह गंभीर मामला अब केवल जुबानी जंग और राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति ट्रंप को कुर्सी से तुरंत हटाने की मांग बहुत तेज हो गई है। सीनेटर क्रिस मर्फी ने एक बहुत ही बड़ा और अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर वह अमेरिकी कैबिनेट का हिस्सा होते तो संविधान के पच्चीसवें संशोधन को लागू करते। यह संशोधन किसी मानसिक रूप से अक्षम राष्ट्रपति को पद से हटाने का अधिकार देता है।
तीसरे विश्व युद्ध का मंडराया खतरा
अनुभवी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने भी इस पूरे विवाद पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। सैंडर्स ने ट्रंप को मानसिक रूप से पूरी तरह असंतुलित नेता बताया है। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस से इस विनाशकारी युद्ध को तुरंत रोकने की जोरदार अपील की है। कई अन्य विपक्षी नेताओं का भी यही मानना है। उन्हें डर है कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह अंधा गुस्सा और हताशा पूरी मानव जाति को तीसरे विश्व युद्ध की भयानक आग में धकेल सकती है।
ईरान का पलटवार और भयानक चेतावनी
दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी धमकियों का डटकर मुकाबला करने का खुला एलान किया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के ये बेहद लापरवाह कदम पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को राख में बदल देंगे। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को किसी कीमत पर नहीं खोलेगा। वे युद्ध में हुए अपने भारी नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।
पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन पर
ईरान की नजर में ट्रंप के ये भड़काऊ बयान सिर्फ उनकी हार की गहरी हताशा को दर्शाते हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें सीधे तौर पर अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन पर टिक गई हैं। हर कोई यह देखना चाहता है कि अमेरिकी लोकतांत्रिक संस्थाएं क्या कदम उठाती हैं। क्या वे अपने ही राष्ट्रपति के इन बेहद खतरनाक और विनाशकारी फैसलों पर कोई लगाम लगा पाएंगी। या फिर यह दुनिया एक बहुत बड़े और भयानक विनाश की तरफ आगे बढ़ जाएगी।


