ईरान के साथ ऐतिहासिक युद्ध विराम समझौते पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, वैश्विक तेल बाजार को मिली बड़ी राहत

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ नए अंतरिम युद्ध विराम समझौते की बड़ी घोषणा की है। इस कूटनीतिक फैसले के बाद वैश्विक राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। ट्रंप के मुताबिक समझौते के कुछ ही घंटों के भीतर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग से बड़े जहाजों की सुरक्षित आवाजाही दोबारा शुरू हो चुकी है।

इनमें से कई बड़े जलपोत कच्चे तेल से पूरी तरह लदे हैं। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक राहत मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ये तेल टैंकर दक्षिणी हाइवे के रास्ते आगे बढ़ रहे हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित है।

जेनेवा में उन्नीस जून को हस्ताक्षरित होगा अंतरिम समझौता

लंबे समय से जारी भीषण सैन्य तनाव के बाद यह ऐतिहासिक अंतरिम समझौता बेहद विपरीत परिस्थितियों में सामने आया है। अब सभी वैश्विक ताकतों की निगाहें सीधे जेनेवा पर टिकी हैं। आने वाले शुक्रवार यानी उन्नीस जून दो हजार छब्बीस को इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शांति समझौते पर दोनों देशों द्वारा आधिकारिक दस्तखत किए जाएंगे।

इस बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक की मेजबानी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ करने वाले हैं। इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। कूटनीतिक गोपनीयता के चलते अभी इस बड़े समझौते की बारीक शर्तें पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

ईरान युद्ध की शुरुआत इसी साल अट्ठाईस फरवरी को हुई थी। लगभग एक सौ सात दिनों के भीषण सैन्य टकराव के बाद यह अंतरिम समझौता धरातल पर आया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह युद्ध विराम की शर्तों को तब तक लागू नहीं करेगा जब तक जेनेवा में दोनों पक्ष इस पर दस्तखत नहीं कर देते।

इजरायल का आक्रामक रुख बनी बड़ी वैश्विक चुनौती

इस शांति समझौते की राह में सबसे बड़ा रोड़ा इजरायल और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह के बीच जारी भीषण जंग है। रविवार को ही इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के उपनगरीय इलाकों पर भीषण बमबारी की थी। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई ने कूटनीतिक प्रयासों को लगभग पटरी से उतार दिया था, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।

इजरायल ने इस अंतरिम समझौते के एलान के बाद बहुत ही आक्रामक रुख अपनाया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज के पहले आधिकारिक बयान ने इस समझौते की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काट्ज ने साफ किया कि जब तक अंतरिम समझौता लंबित है, इजरायल लेबनान में कब्जाई गई जमीन से पीछे नहीं हटेगा।

इजरायली रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि वे लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने कब्जे वाले क्षेत्रों में अनिश्चित काल के लिए बने रहेंगे। इजरायल का यह बड़ा बयान समझौते के लिए झटका है, क्योंकि ईरान ने इस युद्ध विराम को हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों को रोकने की शर्त से सीधे जोड़ा है।

इसके अलावा रक्षा मंत्री काट्ज ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने लेबनान में हमलों के जवाब में कोई सैन्य कार्रवाई की, तो इजरायल ईरान के भीतर पूरी ताकत से जवाबी हमला करेगा। इस गंभीर सैन्य टकराव की आशंका ने जेनेवा में होने वाले समझौते की जमीनी सफलता पर संशय के बादल गहरे कर दिए हैं।

वैश्विक तेल बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे संवेदनशील कूटनीतिक और ऊर्जा शिपिंग मार्ग माना जाता है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। इस भीषण युद्ध के कारण मार्ग बाधित होने से दुनिया भर में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी थीं।

जानकारों का कहना है कि ईरान की सेना का होर्मुज जलमार्ग पर मजबूत नियंत्रण है। ऐसे में बिना ईरान की अंतिम सहमति या समझौते पर हस्ताक्षर के तेल टैंकरों का सुरक्षित निकलना संदेहास्पद लगता है। यही कारण है कि अमेरिकी राजनयिकों की टीम उन्नीस जून से पहले सभी पक्षों के साथ संपर्क स्थापित करने में जुटी है।

जेनेवा में आयोजित होने जा रहे कूटनीतिक कार्यक्रम की सफलता इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो किस प्रकार इजरायली आपत्तियों और ईरान की शर्तों के बीच संतुलन बनाते हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता में तैयार यह मसौदा आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में फैली सैन्य अस्थिरता को खत्म कर सकता है।

Author: Pallavi Sharma

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