Brussels News: ‘गॉड पार्टिकल’ (हिग्स बोसॉन) के अस्तित्व की सैद्धांतिक भविष्यवाणी करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता बेल्जियम के महान भौतिक विज्ञानी फ्रांस्वा एंग्लर्ट का निधन हो गया है। उन्होंने गुरुवार को बेल्जियम में 93 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन से वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है।
‘यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च’ (CERN) ने आधिकारिक तौर पर उनके निधन की जानकारी साझा की है। भौतिकी की दुनिया में ‘हिग्स बोसॉन’ कण का महत्व इतना ज्यादा है कि आम बोलचाल में इसे “गॉड पार्टिकल” यानी भगवान का कण भी कहा जाता है।
विज्ञानी फ्रांस्वा एंग्लर्ट ने ब्रिटिश वैज्ञानिक पीटर हिग्स के साथ मिलकर एक अभूतपूर्व थ्योरी विकसित की थी। इस थ्योरी को विज्ञान की दुनिया में ‘हिग्स फील्ड’ के नाम से जाना जाता है। यह हिग्स फील्ड ही ब्रह्मांड के सभी मूलभूत कणों को उनका वास्तविक द्रव्यमान (मास) प्रदान करता है।
ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने में मिली मदद
वैज्ञानिकों के अनुसार, हिग्स फील्ड ऊर्जा का एक अदृश्य और सर्वव्यापी क्षेत्र है जो पूरे ब्रह्मांड में फैला हुआ है। यदि यह विशेष क्षेत्र मौजूद नहीं होता, तो ब्रह्मांड के बुनियादी कण बिना किसी द्रव्यमान के प्रकाश की गति से दौड़ते रहते। ऐसी स्थिति में परमाणुओं, तारों, ग्रहों या जीवन का निर्माण पूरी तरह असंभव हो जाता।
इस महानतम सैद्धांतिक खोज के लिए साल 2013 में पीटर हिग्स और फ्रांस्वा एंग्लर्ट को संयुक्त रूप से भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया था। उन्हें यह सम्मान उप-परमाणु (सब-एटोमिक) कणों के द्रव्यमान की उत्पत्ति को समझाने वाली जटिल प्रक्रिया की खोज के लिए मिला था।
सब-एटोमिक कण ब्रह्मांड के वे सूक्ष्मतम कण होते हैं, जिनसे मिलकर किसी भी परमाणु का ढांचा तैयार होता है। प्रोफेसर एंग्लर्ट की इस खोज ने आधुनिक विज्ञान को एक नई दिशा दी। उनका यह योगदान आने वाली कई पीढ़ियों के वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को खोजने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
Author: Pallavi Sharma

