Washington News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के नाम अपने संबोधन में पिछले चुनावों के नतीजों पर एक बार फिर गंभीर शक जताया है। गुरुवार शाम दिए अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के 18 राज्यों के मतदाताओं का महत्वपूर्ण डेटा चीन ने हैक या चोरी कर लिया था।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि वह ऑफिस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस, डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस, एफबीआई और सीआईए को इस मामले की पूरी जांच के आदेश दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि इतनी संवेदनशील जानकारी को इतने दिनों तक जनता से क्यों और कैसे छिपाकर रखा गया।
चुनावी सुरक्षा को लेकर जांच की उठाई मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि इस मामले को छिपाने में शामिल लोगों को तुरंत नौकरी से निकाला जाए। अगर जरूरत पड़े तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक आरोप भी तय किए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन की इस बड़ी दखलअंदाज़ी को छिपाना तो महज एक छोटी शुरुआत थी।
ट्रंप ने दस्तावेजों का तीसरा सेट जारी करते हुए दावा किया कि कई सालों तक चुनावी सुरक्षा को लेकर अमेरिकी जनता से साफ झूठ बोला गया। उनके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ बहुत ही आसानी से छेड़छाड़ की जा सकती है, जो एक गंभीर विषय है।
विरोधी देशों से अमेरिकी लोकतंत्र को भारी खतरा
राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि अमेरिका के विरोधी देश चुनावी इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुँचाने की क्षमता रखते हैं। इन देशों में रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ-साथ कई गैर-सरकारी समूह भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वोटर रजिस्ट्रेशन डेटाबेस और पोलबुक सबसे ज्यादा खतरे में हैं।
ट्रंप ने बताया कि वह जनवरी 2020 से जून 2026 तक की सभी खुफिया जानकारियां सार्वजनिक कर रहे हैं। उन्होंने इसे अमेरिकी लोकतंत्र की नींव पर किया गया एक बड़ा साइबर हमला बताया। उन्होंने चीनी सरकार पर अमेरिकी जनता की राय को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया।
संसद से सेव अमेरिका एक्ट पास करने की अपील
ट्रंप ने दावा किया कि चीनी सरकार उन्हें चुनाव में हराना चाहती थी। इसके लिए अमेरिकी पत्रकारों को उनके खिलाफ नेगेटिव खबरें छापने के लिए पैसे दिए गए थे। इन खतरों से निपटने के लिए उन्होंने सांसदों से संसद में तुरंत ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करने की बड़ी मांग की है।
इस नए कानून के तहत वोटिंग की प्रक्रिया पर कई तरह की पाबंदियां और सख्त शर्तें लगाई जाएंगी। इससे वोटिंग के लिए नया रजिस्ट्रेशन कराना काफी मुश्किल हो जाएगा। ट्रंप ने सभी अमेरिकियों से हाउस और सीनेट में अपने प्रतिनिधियों पर यह कानून पास कराने के लिए दबाव बनाने को कहा।

