Delhi News: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को जल्द ही भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिलने वाली है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने उत्तर भारत में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताई हैं। राष्ट्रीय राजधानी में अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने की उम्मीद जताई गई है।
दिल्ली में इस तारीख तक होगी झमाझम मानसून की बारिश
मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक आगामी 4 जुलाई तक मानसून के दिल्ली पहुंचने के आसार हैं। आमतौर पर मानसून 27 या 28 जून तक दिल्ली पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसमें लगभग एक हफ्ते की देरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद अगले पांच से छह दिनों में झमाझम बारिश की संभावना है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भी अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के राज्यों में मानसून के सक्रिय होने की पुष्टि की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई नए हिस्सों को कवर कर लेगा, जिससे वहां के तापमान में भारी गिरावट आएगी।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी बदलेगा मौसम का मिजाज
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के अधिकांश इलाकों में अगले कुछ दिनों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि उत्तर प्रदेश के कुछ चुनिंदा हिस्सों में अभी भी एक-दो दिनों तक लू यानी हीटवेव जैसी स्थिति बनी रह सकती है।
दिल्ली-एनसीआर में जून का महीना बेहद शुष्क और गर्म रहा है, जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जून के दौरान औसत तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, जबकि अत्यधिक उमस के कारण हीट इंडेक्स यानी रियल फील टेंपरेचर 51 डिग्री सेल्सियस के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था।
जानिए आखिर क्यों इस बार देर से आ रहा है मानसून
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान से आने वाली सूखी पश्चिमी हवाओं और अरब सागर की नम हवाओं के आपस में टकराने से मानसून में यह देरी हुई है। इस टकराव के कारण हवा में नमी और उमस तो बहुत बढ़ गई, लेकिन बड़े पैमाने पर बारिश कराने वाले बादलों का निर्माण सही समय पर नहीं हो सका।
दिन के समय तेज धूप के बाद दोपहर बाद ही बादल बन पा रहे हैं, जिससे केवल उमस बढ़ रही है। स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत के अनुसार, दिल्ली के आसमान पर सूखी और नम हवाओं का मिश्रण तो मौजूद है, लेकिन व्यापक वर्षा के लिए जितनी सघन नमी की जरूरत होती है, वह अभी नहीं बन पाई है।

