Uttarakhand News: उत्तराखंड के जौनसार बावर से एक बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। बुल्हाड़ गांव के निवासी अधिवक्ता अखिलेश सिंह रावत ने एक बड़ा इतिहास रच दिया है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट में राज्य का डिप्टी एडवोकेट जनरल (उप महाधिवक्ता) नियुक्त किया गया है। वह इस जनजाति क्षेत्र से यह मुकाम हासिल करने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं।
अखिलेश सिंह रावत अब देश की सबसे बड़ी अदालत में उत्तराखंड सरकार का पक्ष मजबूती से रखेंगे। उनकी इस शानदार उपलब्धि पर पूरे जौनसार क्षेत्र में जश्न का माहौल है। स्थानीय लोग इस खबर से बेहद खुश और उत्साहित नजर आ रहे हैं।
अखिलेश पिछले 11 वर्षों से दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में शानदार वकालत कर रहे हैं। 35 वर्षीय इस युवा वकील ने अपनी कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। उनकी यह शानदार नियुक्ति राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।
राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाला है परिवार
अखिलेश का परिवार हमेशा से समाज सेवा और राजनीति में बहुत सक्रिय रहा है। उनके दादा स्वर्गीय नैन सिंह रावत वर्ष 1983-88 में चकराता के ब्लॉक प्रमुख रहे थे। अखिलेश के पिता प्रताप सिंह रावत ने भी वर्ष 2007 में चकराता सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
उनका परिवार देहरादून जिले के चकराता ब्लॉक के सीमांत गांव बुल्हाड़ में रहता है। यह झमनाण नाम का एक बहुत ही बड़ा और आदर्श संयुक्त परिवार है। इस विशाल संयुक्त परिवार में वर्तमान में करीब पचास सदस्य एक साथ मिल-जुलकर रहते हैं।
इस परिवार के मुखिया सेवानिवृत्त आईआरएस (IRS) कमिश्नर रतन सिंह रावत हैं। अखिलेश इन्हीं रतन सिंह रावत के छोटे भाई प्रताप सिंह रावत के होनहार बेटे हैं। राज्य सरकार ने उनकी शानदार कानूनी काबिलियत को देखते हुए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है।
सरकार के बड़े भरोसे पर खरा उतरने की नई चुनौती
सेवानिवृत्त कमिश्नर रतन सिंह रावत ने इस बड़ी नियुक्ति पर राज्य सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके भतीजे पर एक बहुत बड़ा भरोसा जताया है। यह उनके परिवार और पूरे जनजाति क्षेत्र के लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है।
सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के अहम मुकदमों की पैरवी करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। अखिलेश को अब कानूनी दांव-पेंच के बीच राज्य के हितों की पूरी रक्षा करनी होगी। उनकी इस नई और चुनौतीपूर्ण पारी पर अब पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी रहेंगी।


