टीबी के शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज, लगातार खांसी और वजन घटना हो सकता है गंभीर संकेत

New Delhi News: ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी दुनियाभर में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। अक्सर लोग इसे साधारण खांसी या कमजोरी समझकर टाल देते हैं। यह अनदेखी आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकती है। टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। समय पर पहचान ही इस बीमारी के इलाज को आसान और सफल बनाने का सबसे असरदार तरीका है। आइए जानते हैं टीबी के उन शुरुआती लक्षणों के बारे में जिन्हें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

लगातार खांसी और खून आना

टीबीका सबसे आम और शुरुआती लक्षण है दो-तीन हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी। अगर लंबे समय से खांसी है और सिरप या सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो रही, तो यह फेफड़ों की टीबी का संकेत हो सकता है। जब टीबी का बैक्टीरिया फेफड़ों के टिश्यू को नुकसान पहुंचाना शुरू करता है, तो खांसी के साथ बलगम आने लगता है। कई मामलों में बलगम के साथ खून भी दिखाई दे सकता है, जो एक गंभीर चेतावनी संकेत है। अगर आपको सांस लेते समय या खांसते समय सीने में तेज दर्द महसूस होता है, तो इसे नजरअंदाज न करें।

बुखार, रात में पसीना और अत्यधिक थकान

टीबीके मरीजों में अक्सर हल्का बुखार देखा जाता है, जो खासतौर से शाम या रात के समय बढ़ जाता है। इसके साथ ही मरीज को ठंड या कंपकंपी महसूस हो सकती है। बिना किसी भारी काम के या ठंडे मौसम में भी अगर सोते समय पसीना आए कि कपड़े भीग जाएं, तो यह टीबी का एक लक्षण है। शरीर इन्फेक्शन से लड़ने की कोशिश में अपना तापमान बढ़ाता है, जिसके कारण रात में पसीना आता है। हर समय सुस्ती महसूस होना, बिना कुछ किए ही शरीर में एनर्जी की कमी लगना और सामान्य कामों में भी जल्दी थक जाना टीबी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

तेजी से वजन घटना और भूख न लगना

अगर बिनाकिसी डाइटिंग या जिम के अचानक वजन कम होता देख रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। टीबी के बैक्टीरिया शरीर की एनर्जी सोख लेते हैं और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करते हैं। इससे भूख कम लगती है और शरीर कमजोर होने लगता है। तेजी से वजन घटना और लगातार थकान टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो यह बैक्टीरिया दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से इन्फेक्शन फेफड़ों से बढ़कर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है और इलाज लंबा व मुश्किल हो सकता है। समय पर जांच और इलाज ही इस बीमारी से बचाव का एकमात्र उपाय है।

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