हिमालय में ‘हैंगिंग ग्लेशियर’ का तांडव! NGT की चेतावनी से हड़कंप, क्या खतरे में है चारधाम यात्रा?

Uttarakhand News: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों और बदलते पर्यावरण ने एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मध्य हिमालय की ढलानों पर लटके हुए ‘हैंगिंग ग्लेशियरों’ से उत्पन्न संभावित आपदा पर स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इन संवेदनशील इलाकों की वैज्ञानिक निगरानी और सटीक जोखिम मूल्यांकन नहीं किया गया, तो चारधाम यात्रा मार्गों सहित कई पर्वतीय बस्तियों पर बड़ा संकट आ सकता है।

अलकनंदा घाटी पर मंडराया संकट, माणा और बदरीनाथ सबसे अधिक संवेदनशील

ताजा शोध रिपोर्टों के आधार पर एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित किया है। अध्ययन बताते हैं कि अलकनंदा नदी घाटी में स्थित कई हैंगिंग ग्लेशियर वर्तमान में बेहद अस्थिर स्थिति में पहुंच चुके हैं। विशेष रूप से बदरीनाथ, माणा और हनुमान चट्टी जैसे अति-संवेदनशील क्षेत्र सीधे तौर पर खतरे की जद में हैं। इन स्थानों पर हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति में भारी जनहानि की आशंका बनी रहती है।

बढ़ता निर्माण और भूकंपीय हलचल: विशेषज्ञों ने जताई बड़ी आपदा की आशंका

हिमालयी क्षेत्रों में केवल प्राकृतिक बदलाव ही चिंता का विषय नहीं हैं, बल्कि यहां अनियंत्रित तरीके से हो रहे निर्माण कार्य भी आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से पिघलती बर्फ, लगातार हो रही सड़क-पुल निर्माण की गतिविधियां और इस क्षेत्र की भूकंपीय सक्रियता मिलकर किसी बड़े हिमस्खलन को न्योता दे रही हैं। अचानक होने वाले मलबा प्रवाह से निचले इलाकों में बसे आधारभूत ढांचे और हजारों जिंदगियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

NGT का सख्त रुख: केंद्र और राज्य की विभिन्न संस्थाओं से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

ट्रिब्यूनल ने इस पूरे मामले को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के तहत एक अत्यंत गंभीर विषय करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि विकास कार्यों के गलत पर्यावरणीय मूल्यांकन का नतीजा भी हो सकता है। इसी के चलते पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद सहित कई राष्ट्रीय संस्थानों को प्रतिवादी बनाया गया है। इन सभी विभागों को 6 अगस्त की अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।

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