कसेंदा गांव में हिंसक बंदरों का खौफनाक आतंक, छतों से लेकर कमरों तक कब्जा और हमले में कई लोग लहूलुहान

Uttar Pradesh News: विकास खंड क्षेत्र के कसेंदा गांव में इन दिनों हिंसक बंदरों का आतंक चरम पर पहुंच गया है। सुबह होते ही दर्जनों बंदरों के बड़े झुंड गांव की मुख्य गलियों और मकानों की छतों पर कब्जा जमा लेते हैं। उत्पाती जानवरों की इन हरकतों से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हिंसक बंदरों ने अब तक कई मासूम नागरिकों पर जानलेवा हमला करके उन्हें बुरी तरह घायल कर दिया है। इस भयानक समस्या के कारण लोगों का अपने घरों से सुरक्षित बाहर निकलना और छतों पर जाना पूरी तरह से दूभर हो चुका है।

खुले दरवाजों से कमरों में घुसकर मचा रहे भारी उत्पाद

गांव के निवासी लालता कुशवाहा, चंद्रिका प्रसाद, सोनू और अमजद ने बताया कि सूर्योदय होते ही बंदर घरों पर धावा बोल देते हैं। यदि किसी घर का मुख्य दरवाजा गलती से भी खुला रह जाए, तो ये सीधे किचन में घुसकर खाने-पीने का सारा कीमती सामान पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं।

बंदरों का झुंड रसोईघर में रखे ताजे फल, सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री उठाकर आसानी से भाग जाता है। इतना ही नहीं, ये हिंसक जानवर कमरों के भीतर रखे घरेलू बर्तनों, कपड़ों और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं को इधर-उधर फेंककर भारी वित्तीय नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।

बुजुर्गों और मासूम बच्चों को अकेले बाहर भेजने से कतरा रहे अभिभावक

इस विकट समस्या से महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग छतों पर रोजमर्रा के कपड़े सुखाने या अनाज फैलाने जैसे घरेलू कार्यों के लिए जाने से कतराते हैं। अभिभावक अपने छोटे बच्चों को गलियों में अकेले भेजने से पूरी तरह डर रहे हैं।

स्थानीय पीड़ित अनिल कुमार, रमेश और कमलेश ने बताया कि गांव में बंदरों की आबादी लगातार तेजी से बढ़ती जा रही है। जब भी कोई नागरिक इन्हें भगाने का प्रयास करता है, तो ये जानवर अत्यधिक आक्रामक होकर सीधे हमला करने के लिए दौड़ पड़ते हैं।

अधिकारियों की घोर लापरवाही से आक्रोशित ग्रामीण और वन विभाग का आश्वासन

पीड़ित राज कुशवाहा और उमेश कुशवाहा ने बताया कि इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए कई बार ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों से लिखित शिकायत की गई। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की घोर लापरवाही के कारण अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

स्थानीय किसान अजीम और अनूप ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि बंदर खेतों और घरों दोनों जगह भारी तबाही मचा रहे हैं। इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की विशेष टीम से जल्द ही संपर्क किया जाएगा।

Author: Ajay Mishra

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