Nagpur News: देश भर में जारी भीषण गर्मी ने नागपुर जैसे शहरों में पारा 40 डिग्री के पार पहुँचा दिया है। तापमान बढ़ने के साथ ही बिजली की खपत भी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए बिजली के बिल अब उनकी मासिक कमाई का एक बड़ा हिस्सा हड़प रहे हैं।
अनुराधा जैसे परिवारों का संघर्ष
सुदाम नगरी जैसी बस्तियों में हालात बदतर हैं। 40 वर्षीय अनुराधा कावले जैसे लोग गर्मी के बावजूद कूलर चलाने से बच रहे हैं क्योंकि बिजली की प्रति यूनिट दर 10 रुपये से अधिक हो गई है। उनके घर का बिजली बिल उनकी कुल आय का 10 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है।
महाराष्ट्र में बिजली क्यों है इतनी महंगी?
महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (MSEDCL) ने अपने पावर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 234.5 अरब रुपये का बड़ा निवेश किया है। इस भारी पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) का वित्तीय बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने 2030 तक दरों में 26 फीसदी कटौती का वादा किया है, लेकिन यह राहत केवल 100 यूनिट से कम खपत करने वालों के लिए है।
किसानों के लिए बिजली की टाइमिंग बनी सिरदर्द
बिजली का संकट केवल शहरों तक सीमित नहीं है। केलापुर के किसानों को सरकार सब्सिडी वाली बिजली तो दे रही है, लेकिन उसकी टाइमिंग बेहद अव्यवहारिक है। सुबह 8 बजे से दोपहर तक बिजली मिलने के कारण किसानों को जानलेवा धूप में खेतों में काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ गए हैं और कई किसान सिंचाई करने की स्थिति में नहीं हैं।
थिंकटैंक ‘इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट’ (IRADe) ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकारों को गर्मियों के दौरान कम आय वाले परिवारों के लिए ‘सीजनल सब्सिडी’ शुरू करनी चाहिए। यदि बिजली की आपूर्ति समय सारणी को किसानों की सुविधा के अनुसार बदला जाए, तो न केवल फसल की पैदावार बढ़ेगी बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
Author: Shilla Bhatia

