Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों के भुगतान पर लगी रोक को हटा दिया है। अदालत ने राज्य सरकार के आदेश को तुरंत प्रभाव से स्थगित कर दिया। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने साफ कहा कि विजिलेंस जांच का बहाना बनाकर फंड रोकना अदालत के पुराने निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
अदालत ने सरकार से पूछा अवहेलना पर क्यों न हो कार्रवाई
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने स्वास्थ्य सचिव का 30 मई 2026 का एक आधिकारिक पत्र पेश किया। इस पत्र में जांच पूरी होने तक केवल प्राइवेट अस्पतालों का पैसा रोकने की बात कही गई थी। इस पर हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने सरकार से पूछा कि आदेश की अवहेलना करने पर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए।
हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि वह 21 मई को जारी पुराने आदेश का पूरी तरह पालन करे। अदालत ने गैर-डायलिसिस मामलों की देखरेख के लिए नियुक्त सात विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम व्यवस्था को तुरंत चालू करने को कहा। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि डायलिसिस और अन्य इलाजों के लाखों रुपये पहले ही बांटे जा चुके हैं।
सत्यापन प्रक्रिया में देरी और अस्पतालों पर गैर-जरूरी दबाव का आरोप
प्राइवेट अस्पतालों ने अदालत में दलील दी कि सरकारी स्तर पर मेडिकल दावों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया बेहद सुस्त है। याचिकाकर्ता अस्पतालों ने आरोप लगाया कि जानबूझकर अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे जा रहे हैं। वेरिफिकेशन के नाम पर अनावश्यक देरी करके उनका बकाया फंड रोका जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
महाधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि किसी भी अस्पताल पर कोई गलत दबाव नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि गैर-जरूरी सवाल पूछकर क्लेम पेमेंट में बिल्कुल देरी नहीं होगी। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन अस्पतालों के दावों का सत्यापन पूरा हो चुका है, उन्हें उनका वित्तीय भुगतान तुरंत ट्रांसफर किया जाए।
इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई अब 25 जून 2026 को तय की गई है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आगामी सुनवाई में मेडिकल दावों के सत्यापन और किए गए कुल भुगतान की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करे। इसके बाद ही मामले में आगे का फैसला लिया जाएगा।
Author: Sunita Gupta


