Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। अखिल भारतीय लोकतांत्रिक महिला संघ (एडवा) ने राज्य में कानून-व्यवस्था की बदहाली पर गहरी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि राज्य सरकार सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रही है। यहां साल 2026 में अब तक 478 मामले दर्ज हो चुके हैं।
एडवा की राज्य अध्यक्ष रंजना जारेट और सचिव फाल्मा चौहान ने साझा बयान जारी किया है। उन्होंने शिमला जिले में एक ही हफ्ते में हुई दो बड़ी घटनाओं की कड़ी निंदा की। रोहड़ू में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं एक बुजुर्ग महिला का गला घोंट दिया गया।
देवभूमि में बढ़ता खौफ और सरकारी दावों की पोल
महिला नेताओं के अनुसार ऐसी खौफनाक घटनाएं महिलाओं के मन में डर पैदा कर रही हैं। मंडी, कांगड़ा, सरकाघाट, कुल्लू और सैंज जैसे जिलों से भी हिंसा के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के जख्म आज भी लोगों के दिलों में पूरी तरह ताजा हैं। सरकार के सुरक्षा दावे जमीनी स्तर पर फेल साबित हुए हैं।
राज्य के विभिन्न हिस्सों से हत्या, अपहरण, यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना की खबरें लगातार आ रही हैं। संघ ने बताया कि चालू वर्ष में दर्ज 478 मामलों में से 49 मामले सीधे तौर पर पॉक्सो एक्ट (POCSO) के तहत दर्ज हैं। ये मामले नाबालिग बच्चियों के साथ हुए गंभीर यौन अपराधों से जुड़े हुए हैं।
घरेलू हिंसा के छुपे आंकड़े और न्याय की गुहार
आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में छेड़छाड़ के 117 और अपहरण के लगभग 110 मामले दर्ज किए गए हैं। संघ का बड़ा आरोप है कि घरेलू हिंसा के अनगिनत मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। इन मामलों को अक्सर स्थानीय स्तर पर ही दबा दिया जाता है, जिससे असली आंकड़ा सामने नहीं आता।
महिला संगठन ने सरकार से अपराधियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने पुलिस प्रशासन को मजबूत करने और मामलों की त्वरित जांच सुनिश्चित करने की अपील की। संघ का कहना है कि जब तक आरोपियों को कड़ी सजा नहीं मिलेगी, तब तक महिलाओं में सुरक्षा की भावना नहीं आएगी।
Author: Sunita Gupta


