New Delhi News: वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी ताजा भू-राजनीतिक जोखिम संबंधी वैश्विक रिपोर्ट में एक बड़ी चेतावनी जारी की है। एजेंसी के अनुसार ऊर्जा आपूर्ति के लिए प्रमुख समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सुधर सकती है। हालांकि वैश्विक तनाव को देखते हुए यह सुधार सामान्य तरीके से नहीं होगा। इसके लिए तेल आयातक देशों को द्विपक्षीय समझौतों का सहारा लेना पड़ेगा। मूडीज ने इस संकट के चलते भारत समेत कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के विकास की रफ्तार धीमी होने का अंदेशा जताया है।
ईरान के साथ अलग से समझौते करेंगे भारत और चीन, समुद्री व्यापार बचाने के लिए नए पारगमन गलियारों की तलाश
वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े तेल आयातक देश समुद्री सुरक्षा के लिए नए रास्ते अपना रहे हैं। ये सभी एशियाई देश ऊर्जा सुरक्षा के लिए ईरान के साथ अलग-अलग स्तर पर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकते हैं। वर्तमान में लारक द्वीप और ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास कुछ समन्वित पारगमन गलियारे उभर रहे हैं। इसके बावजूद इन संवेदनशील समुद्री रास्तों पर संघर्ष-पूर्व स्तर की सुरक्षित आवाजाही बहाल होना बेहद मुश्किल दिखता है।
जलडमरूमध्य में छह महीने बाद भी नहीं सुधरेंगे हालात, वैश्विक तेल बाजार पर लंबे समय तक बना रहेगा आपूर्ति संकट
रेटिंग एजेंसी ने अपनी व्यापक आर्थिक रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि यदि अगले छह महीनों में जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही फिर शुरू भी हो जाती है, तब भी वैश्विक तेल बाजार आसानी से संभल नहीं पाएगा। दुनिया भर का ऊर्जा बाजार काफी समय तक गंभीर आपूर्ति संकट से जूझता रहेगा। इस रुकावट के कारण कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बड़ा उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इसका सीधा नकारात्मक असर विभिन्न देशों में उत्पादन लागत, मांग और वित्तीय परिस्थितियों पर पड़ेगा।
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर के पार जाने का अनुमान, दुनिया के कई बड़े देशों की जीडीपी ग्रोथ रेट घटेगी
मूडीज ने स्थिति का विश्लेषण करते हुए अनुमान जताया है कि इस वर्ष ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे दायरे में रह सकती हैं। नए भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और युद्ध के चलते कीमतों में इससे बाहर भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। एजेंसी के मुताबिक यदि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 110 डॉलर के करीब बनी रहती हैं, तो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की गिरावट आएगी।
पश्चिम एशिया पर निर्भरता के कारण भारत पर टूटेगा सबसे बड़ा संकट, रुपये की कमजोरी और वित्तीय घाटा बढ़ने का डर
इस वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण भारत सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों की सूची में शामिल है। इसका मुख्य कारण यह है कि भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का करीब 46 प्रतिशत हिस्सा आज भी पश्चिम एशिया के देशों से ही खरीदता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची रहने से भारतीय मुद्रा रुपये पर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। इससे देश के चालू खाते के घाटे (कैड) और राजकोषीय प्रबंधन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
मूडीज ने साल 2026 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान घटाया, छह प्रतिशत पर आ जाएगी देश की आर्थिक रफ्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले इस चौतरफा दबाव को देखते हुए रेटिंग एजेंसी ने एक बड़ा कदम उठाया है। मूडीज ने मई के अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 0.8 प्रतिशत अंक तक घटा दिया है। इस कटौती के बाद अब भारत की आर्थिक विकास दर का नया अनुमान महज छह प्रतिशत रह गया है। यह नया आंकड़ा भारतीय नीति निर्माताओं और देश के राजकोषीय प्रबंधकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन सकता है।
संघर्ष के बाद समुद्री यातायात में 90 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट, इंश्योरेंस और बारूदी सुरंगों ने बढ़ाई पोत परिवहन की आफत
रिपोर्ट के विस्तृत आंकड़ों के अनुसार भू-राजनीतिक संघर्ष शुरू होने के बाद से इस पारंपरिक मार्ग से होने वाले समुद्री यातायात में 90 प्रतिशत से अधिक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। जहाजों की सुरक्षा के लिए बीमा लागत काफी ज्यादा बढ़ गई है। इसके अलावा गंभीर सुरक्षा जोखिम और खुले समुद्र में खतरनाक बारूदी सुरंगों की मौजूदगी के कारण पोत परिवहन गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हुई हैं। इन्हीं कारणों से ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 90 से 120 डॉलर प्रति बैरल के बीच झूल रही हैं।

