ईडी दफ्तर में घुसते ही कांपने लगे रसूखदार कारोबारी के हाथ, लिफ्ट का बटन तक दबाना भूले; बंगाल के इस बड़े घोटाले में बड़ी कार्रवाई

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित नगरपालिका भर्ती घोटाले की आंच अब राज्य के रसूखदार नेताओं से होते हुए उनके करीबी कारोबारियों तक पहुंचने लगी है। सूबे में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार बनते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) बेहद आक्रामक मोड में आ गया है। शनिवार को कोलकाता के साल्ट लेक स्थित ईडी दफ्तर में एक ऐसा नजारा दिखा जिसने पूरे राज्य के राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में भारी सनसनी फैला दी है।

पूर्व मंत्री सुजीत बोस के बेहद खास उत्तम बोस को ईडी ने किया तलब, जांच एजेंसी के दफ्तर में दिखे बदहवास

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने राज्य की पूर्ववर्ती सरकार में कद्दावर मंत्री रहे सुजीत बोस के बेहद करीबी और वित्तीय रणनीतिकार माने जाने वाले बड़े कारोबारी उत्तम बोस को पूछताछ के लिए तलब किया था। जब उत्तम बोस साल्ट लेक के सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद हैरान करने वाला था। केंद्रीय जांच एजेंसी के डर और भारी मानसिक दबाव के चलते उत्तम बोस इस कदर घबराए हुए थे कि दफ्तर में घुसते ही वह सुध-बुध खो बैठे।

अत्यधिक घबराहट के कारण लिफ्ट का पैनल तक भूल गए उद्योगपति, कांपते हाथों से ढूंढते रहे बटन

शनिवार सुबह जब उत्तम बोस अपनी गाड़ी से साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे, तो वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और मीडियाकर्मियों ने उनके चेहरे पर साफ तौर पर हवाइयां उड़ती देखीं। वह पूरी तरह से सहमे हुए नजर आ रहे थे। जब वह पूछताछ के लिए बिल्डिंग के भीतर गए, तो अत्यधिक घबराहट और हड़बड़ाहट के कारण उन्हें लिफ्ट का पैनल तक ठीक से समझ नहीं आ रहा था। वह लिफ्ट का बटन दबाने के लिए काफी देर तक जूझते रहे।

साल्ट लेक और दमदम में था पूर्व मंत्री का सिक्का, वीआईपी नजदीकियां अब उत्तम बोस के लिए बनीं मुसीबत

कोलकाता और उसके आस-पास के कॉर्पोरेट हलकों में उत्तम बोस एक जाना-माना नाम हैं। उनकी असली ताकत का जरिया पूर्व मंत्री सुजीत बोस के साथ उनकी गहरी नजदीकियां थीं। पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान सुजीत बोस का साल्ट लेक और दमदम के इलाकों में भारी राजनीतिक रसूख चलता था। उत्तम बोस को सुजीत बोस का दाहिना हाथ माना जाता था। बदलते राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय जांच एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता के बाद यही वीआईपी नजदीकियां अब उनके लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी हैं।

नगरपालिका भर्ती घोटाले के काले धन को सफेद करने का आरोप, शेल कंपनियों के जरिए निवेश की आशंका

जांचकर्ताओं का मानना है कि करोड़ों रुपये के नगरपालिका भर्ती घोटाले से कमाए गए काले धन को सफेद करने और उसे विभिन्न व्यावसायिक लेन-देन में खपाने के लिए उत्तम बोस की कंपनियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था। यही वजह है कि ईडी ने उन्हें नोटिस भेजकर सीधे तलब कर लिया। एक रसूखदार कारोबारी की केंद्रीय एजेंसी के दफ्तर में ऐसी हालत देखकर हर कोई हैरान था। यह इस बात का स्पष्ट सबूत था कि घोटाले की जांच को लेकर उनके मन में कितना बड़ा डर समाया हुआ है।

साल 2014 से 2021 के बीच नगरपालिकाओं में हुई थीं अवैध भर्तियां, रिश्वत लेकर बांटी गईं सरकारी नौकरियां

यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल की विभिन्न नगरपालिकाओं में साल 2014 से 2021 के बीच हुई क्लर्क, सफाईकर्मी और चालकों की अवैध भर्तियों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि अयोग्य उम्मीदवारों से लाखों रुपये की रिश्वत लेकर उन्हें सरकारी नौकरियां बांटी गईं। इस घोटाले की जांच सबसे पहले सीबीआई ने शुरू की थी, जिसके बाद पैसों के अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच करने के लिए केंद्रीय एजेंसी ईडी की एंट्री हुई थी।

जांच एजेंसी के हाथ लगीं संदिग्ध वित्तीय लेन-देन वाली डायरियां, रियल एस्टेट निवेश के ब्योरे खंगाल रही ईडी

ईडी सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी के हाथ कई ऐसी डायरियां और डिजिटल दस्तावेज लगे हैं, जिनमें संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के पुख्ता रिकॉर्ड दर्ज हैं। इस मामले में पूर्व मंत्री से भी पूछताछ की कड़ियां जुड़ रही हैं। अब संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन में उत्तम बोस और पूर्व मंत्री सुजीत बोस या उनके करीबियों के खातों के बीच हुए बड़े वित्तीय लेन-देन का ब्योरा खंगाला जा रहा है। ईडी पता लगा रही है कि क्या भर्ती घोटाले का पैसा उत्तम बोस की रियल एस्टेट कंपनियों के माध्यम से जमीनों को खरीदने में निवेश किया गया था।

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