West Bengal News: पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद प्रशासनिक गलियारों से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार ने राज्य की वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने का फैसला किया है। खुफिया विंग की नई ‘खतरे के आकलन’ (Threat Assessment) रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं, पूर्व मंत्रियों और पूर्व आईपीएस अधिकारियों की सुरक्षा में भारी कटौती कर दी है।
इन कद्दावर नेताओं और पूर्व पुलिस कप्तानों के घरों से हटाए गए सुरक्षा बल, व्यक्तिगत जवानों की संख्या घटी
नई गृह नीति के तहत चिन्हित किए गए हाई-प्रोफाइल लोगों के घरों के बाहर तैनात अतिरिक्त पुलिस बल को तुरंत प्रभाव से वापस बुला लिया गया है। इस वीआईपी सुरक्षा कटौती सूची में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, पूर्व कद्दावर मंत्री अरूप बिस्वास और तृणमूल के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा बेलियाघाटा के मौजूदा विधायक कुणाल घोष और कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी के सुरक्षा घेरे को भी काफी छोटा कर दिया गया है।
नौकरशाही पर भी चला चाबुक: पूर्व डीजीपी राजीव कुमार और मनोज मालवीय की अतिरिक्त सुरक्षा वापस
सरकार की इस औचक कार्रवाई की जद में राज्य के पूर्व रसूखदार पुलिस अधिकारी भी आ गए हैं। गृह विभाग के आदेश पर पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और वर्तमान राज्यसभा सदस्य राजीव कुमार, सेवानिवृत्त डीजीपी मनोज मालवीय तथा पूर्व कार्यवाहक डीजीपी पीयूष पांडे की विशेष सुरक्षा हटा ली गई है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इन पूर्व अधिकारियों के काफिले से एस्कॉर्ट गाड़ियां और अतिरिक्त कमांडो दस्ते पूरी तरह से हटा लिए गए हैं।
पद और वास्तविक खतरे के आधार पर हुई व्यापक समीक्षा, विशेष परिस्थितियों वाले विशेषाधिकार अब समाप्त
कोलकाता के राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ के सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति ने हाल ही में एक व्यापक समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में जांचा गया कि किस व्यक्ति को इस समय जमीन पर वास्तविक खतरा है और कौन केवल अपने पुराने राजनीतिक रसूख के कारण सुरक्षा ले रहा है। इसी के बाद तय हुआ कि विशेष परिस्थितियों या पुराने पदों के आधार पर दी गई अतिरिक्त सुरक्षा को खत्म कर सामान्य श्रेणी में बदला जाए।
पूर्व मंत्री अरूप विश्वास और विधायक कुणाल घोष का सुरक्षा घेरा हुआ बेहद सामान्य, यह है असली वजह
सुरक्षा समीक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पूर्व तृणमूल मंत्री अरूप विश्वास को पहले कैबिनेट मंत्री होने के कारण उच्च स्तरीय सुरक्षा कवच मिला हुआ था। अब वह न तो सरकार में मंत्री हैं और न ही विधायक, इसलिए उनकी सुरक्षा घटाई गई है। वहीं, सारदा चिटफंड घोटाले में जमानत मिलने के बाद कुणाल घोष को अदालत के पुराने आदेश पर विशेष सुरक्षा मिली थी। अब उन्हें केवल एक सामान्य विधायक के स्तर की सुरक्षा मिलेगी।
पूरी तरह सुरक्षाविहीन नहीं होंगे कल्याण बनर्जी और राजीव कुमार, मौजूदा प्रोटोकॉल के तहत मिलते रहेंगे जवान
गृह विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को पूरी तरह से सुरक्षाविहीन नहीं किया गया है। इन दोनों ही नेताओं को उनके वर्तमान संवैधानिक और प्रशासनिक पदों के अनुरूप मिलने वाली तय सुरक्षा मिलती रहेगी। यानी सांसद और राज्यसभा सदस्य होने के नाते उन्हें जो बुनियादी प्रोटोकॉल सुरक्षा मिलनी चाहिए, वह जारी रहेगी। केवल पुरानी सरकार द्वारा दिया गया अतिरिक्त सुरक्षा घेरा वापस हुआ है।
अभिषेक बनर्जी की ‘Z-Plus’ सुरक्षा और पायलट कार हटाने से शुरू हुआ था नया सुरक्षा ऑडिट
सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की यह पूरी प्रक्रिया तब शुरू हुई जब सुवेंदु सरकार ने सबसे पहले टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा की कड़े स्तर पर समीक्षा की थी। नई सरकार ने उनके सुरक्षा बेड़े से अति-विशिष्ट ‘Z-Plus’ श्रेणी का सुरक्षा कवच हटा दिया था। इसके साथ ही उनकी विशेष पायलट कार सुविधा भी पूरी तरह बंद कर दी गई थी। उनके कालीघाट आवास और कैमक स्ट्रीट कार्यालय के बाहर से पुलिस बल हटा दिया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में नहीं होगी कोई कटौती, कोलकाता पुलिस को मिले पुख्ता निर्देश
हालांकि, नई भाजपा सरकार ने कूटनीतिक और राजनीतिक शिष्टाचार का परिचय देते हुए साफ किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कटौती नहीं की जाएगी। राज्य प्रशासन ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को लिखित निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास, उनकी यात्राओं और सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले की तरह ही जेड-प्लस श्रेणी की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य रूप से जारी रहेगी।

