ED की जांच में अमेरिकी एनजीओ के बड़े रैकेट का पर्दाफाश, हजार विदेशी डेबिट कार्ड से देश में आया करोड़ों का फंड

Delhi News: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने अमेरिका के एक गैर सरकारी संगठन से जुड़े बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच एजेंसी को सीमा पार से होने वाली संदिग्ध फंडिंग की कड़ियों का पता चला है। इस बड़े नेटवर्क के जरिए विदेशी पैसा अवैध तरीके से सीधे भारत लाया जा रहा था।

इस पूरे खेल में भारतीय बैंकिंग नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। नेटवर्क से जुड़े लोगों ने जरूरी जांच प्रक्रियाओं को भी दरकिनार कर दिया था। यह पूरी साजिश अमेरिका के संगठन द टिमोथी इनिशिएटिव और भारत के कुछ एजेंटों के बीच मिलकर रची गई थी।

विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारतीय एटीएम से निकला पैसा

जांच अधिकारियों के मुताबिक इस नेटवर्क ने फंड को ट्रांसफर करने के लिए विदेशी डेबिट कार्ड का एक बहुत बड़ा जाल बुना था। इसके लिए अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक द्वारा जारी किए गए डेबिट कार्ड का इस्तेमाल हुआ। यह कार्ड भारत में उन लोगों को बांटे गए जो असली खाताधारक नहीं थे।

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि इस खतरनाक अरेंजमेंट के तहत साल 2019 से लेकर अब तक पूरे भारत में 1,000 से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड बांटे गए थे। इन कार्ड्स की मदद से भारतीय बैंकिंग सिस्टम की नजरों से बचकर करोड़ों रुपये की विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया गया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच इस खुफिया मैकेनिज्म से करीब 92.55 करोड़ रुपये का विदेशी फंड ठिकाने लगाया गया। इसके अलावा जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच इस नेटवर्क ने भारतीय एटीएम से लगभग 44 करोड़ रुपये कैश निकाले थे।

पहचान छिपाने के लिए संतोष कुमार नाम का हुआ इस्तेमाल

केंद्रीय जांच एजेंसी को तफ्तीश में पता चला कि लगभग 23 डेबिट कार्ड सिर्फ संतोष कुमार के नाम पर जारी किए गए थे। ईडी का मानना है कि असली यूजर्स की पहचान छिपाने और बैंक के कड़े केवाईसी नियमों से बचने के लिए यह फर्जीवाड़ा किया गया था।

ईडी ने इस पूरे मामले को एक वेल कोऑर्डिनेटेड क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी यानी सुनियोजित आपराधिक साजिश करार दिया है। इस सिस्टम को विशेष रूप से इसलिए डिजाइन किया गया था ताकि भारतीय एटीएम मशीनों का इस्तेमाल करके अमेरिकी सोर्स से सीधे नकदी निकाली जा सके और कोई पकड़ा न जाए।

इस मामले में बड़ी कामयाबी तब मिली जब सुरक्षा अधिकारियों ने बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुख्य फाइनेंशियल ऑपरेटिव मीका मार्क को धर दबोचा। जांच टीम को आरोपी के पास से ट्रूइस्ट बैंक के 24 एक्टिव डेबिट कार्ड बरामद हुए, जिससे हड़कंप मच गया।

बेंगलुरु एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी के बाद खुले कई राज

इसके बाद जांच टीम ने अजीत मथाई के ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। वहां अधिकारियों को 37 लाख रुपये कैश मिले, जिनमें ज्यादातर 500 रुपये के नोट थे। इसके साथ ही वहां अजीत मथाई द टिमोथी इनिशिएटिव नाम का एक कॉर्पोरेट डेबिट कार्ड भी मिला।

इस एनजीओ के ऑपरेशनल स्ट्रक्चर ने खास प्लानिंग के तहत काम किया। संस्था ने स्ट्रक्चर्ड उपदेशों, ट्रेनिंग प्रोग्राम और विचारधारा के प्रचार-प्रसार के जरिए हमारे समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को अपना निशाना बनाया। पिछड़े इलाकों की गरीबी का इस काम में जमकर फायदा उठाया गया।

जांच में इस अवैध नेटवर्क के ऑपरेशन्स हेड जोनाथन एस राजन की भूमिका भी सामने आई है। राजन ने कथित तौर पर ऐसे सीक्रेट सिस्टम तैयार किए थे जो गरीब और पिछड़े इलाकों की आर्थिक मजबूरियों का फायदा उठाकर उन्हें इस अवैध फंडिंग नेटवर्क का हिस्सा बना देते थे।

Author: Harikarishan Sharma

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