Sports News: क्रिकेट के मैदान पर पिच रोलर की भूमिका हमेशा से बेहद खास और निर्णायक मानी जाती है. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) के कड़े नियमों के मुताबिक, मैच के दौरान बल्लेबाजी करने वाली टीम के कप्तान को अपनी पसंद का रोलर चुनने का पूरा अधिकार होता है.
क्वालिफायर 2 मुकाबले में गुजरात टाइटंस का रन चेज शुरू होने से ठीक पहले न्यू चंडीगढ़ की पिच पर हैवी रोलर चलाया गया. इस रोलर ने खेल की स्थिति पर ऐसा गहरा असर डाला कि राजस्थान रॉयल्स की टीम 214 रनों का विशाल स्कोर बनाने के बावजूद हार गई.
हैवी रोलर ने गुजरात टाइटंस के लिए आसान बनाई बल्लेबाजी
राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग ने हैवी रोलर को ही गुजरात टाइटंस की इस शानदार जीत की सबसे बड़ी वजह बताया है. उनके मुताबिक 215 रन का लक्ष्य डिफेंड करने लायक था. लेकिन मिड इनिंग में रोलर चलने से विकेट पूरी तरह बदल गया.
पिच पर हैवी रोलर के चलने से असमान उछाल पूरी तरह खत्म हो जाता है. यह रोलर मिट्टी को गहराई से दबाकर सतह को पूरी तरह समतल कर देता है. इससे गेंदबाजों को सीम मूवमेंट मिलना बंद हो जाती है और बल्लेबाजों के लिए रन बनाना बेहद आसान हो जाता है.
जानिए कितना भारी होता है हैवी और लाइट रोलर?
क्रिकेट में इस्तेमाल होने वाले भारी रोलर का कुल वजन 1500 किलोग्राम से लेकर 2500 किलोग्राम तक होता है. इसके चलने से पिच की मिट्टी सख्त हो जाती है, जिससे टर्न कम मिलता है. यही वजह थी कि दूसरी पारी में स्पिनरों को पिच से कोई मदद नहीं मिली.
इसके विपरीत, लाइट रोलर का वजन केवल 500 किलोग्राम से 1000 किलोग्राम के बीच होता है. इसका उपयोग विकेट की ऊपरी सतह को चिकना करने और हल्की दरारों को ठीक करने के लिए किया जाता है. यह पिच की गहराई या उसके मूल स्वभाव पर कोई असर नहीं डालता.
लाइट रोलर चलने पर गेंदबाजों को मिलती है अधिक मदद
हल्के रोलर के इस्तेमाल के बाद भी विकेट के अंदर गेंदबाजों के लिए पर्याप्त मदद मौजूद रहती है. जब टीमें पिच के वास्तविक मिजाज में ज्यादा बदलाव नहीं चाहती हैं, तब वे केवल लाइट रोलर की मांग अंपायर से करती हैं.
क्रिकेट के हर फॉर्मेट में रोलर की अपनी अलग अहमियत होती है, लेकिन टेस्ट मैचों में यह जीत-हार तय करता है. 1930 के दशक में मैन्युअल हैवी रोलर होते थे. अब आधुनिक मैदानों पर इनकी जगह मोटरचालित स्वचालित रोलर्स ने ले ली है.
रोलर चुनने का अधिकार केवल बल्लेबाजी टीम के पास
आईसीसी के आधिकारिक नियम 10(a) के मुताबिक, मैच के दौरान बल्लेबाजी करने वाली टीम के कप्तान के अनुरोध पर ही पिच को रोल किया जा सकता है. इसके साथ ही नियम 10(c) कप्तानों को रोलर के प्रकार को चुनने की पूरी आजादी देता है.
यदि मैदान पर एक से अधिक प्रकार के रोलर उपलब्ध हैं, तो बैटिंग टीम का कप्तान ही तय करेगा कि खेल के बीच में कौन सा रोलर मैदान पर आएगा. रियान पराग का यह बयान अब सोशल मीडिया पर क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
Author: Prem Sharma

