Rabat News: फुटबॉल की दुनिया में मोरक्को की राष्ट्रीय टीम ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक क्रांति का आगाज किया है। साल 2014 में जो मोरक्को वैश्विक फीफा रैंकिंग में 82वें स्थान पर बेहद कड़ा संघर्ष कर रहा था, आज वह फुटबॉल जगत की महाशक्तियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर रहा है।
साल 2022 के कतर विश्व कप में बेल्जियम, क्रोएशिया, स्पेन और पुर्तगाल जैसी दुनिया की दिग्गज टीमों को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचने वाला मोरक्को पहला अफ्रीकी और अरब देश बना था। इसके बाद से ही मोरक्को के एटलस लायंस ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा है।
अंतरराष्ट्रीय मैचों में लगातार जीत का बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
इस ऐतिहासिक सफलता के बाद मोरक्को ने लगातार 19 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीतकर खेल जगत में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इसके साथ ही टीम ने अपने पूरे इतिहास का पहला ओलंपिक फुटबॉल मेडल भी अपने नाम किया है। वर्तमान में मोरक्को फीफा विश्व रैंकिंग में सीधे 7वें स्थान पर पहुंच चुका है।
यह शानदार रैंकिंग किसी भी अफ्रीकी या अरब देश के लिए अब तक का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है। टैंजियर के रहने वाले प्रसिद्ध फोटोग्राफर और क्यूरेटर मेहदी सेफ्रियोई बताते हैं कि इस अद्भुत फुटबॉल क्रांति ने मोरक्को के आम नागरिकों को एक ऐसा वैश्विक गौरव दिया है, जिसकी उन्हें तलाश थी।
बुनियादी ढांचे में भारी निवेश और सरकारी मास्टरप्लान सफल
विशेषज्ञों के अनुसार मोरक्को की यह ऐतिहासिक सफलता रातों-रात नहीं मिली है। यह देश के खेल बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में किए गए भारी और बिल्कुल सही निवेश का सीधा परिणाम है। मोरक्को ने पुरानी व्यवस्था में सुधार की बजाय पूरी खेल प्रणाली को शून्य से नए सिरे से तैयार किया है।
विशेषज्ञों का दृढ़ विश्वास है कि खेल में किया गया यह बड़ा सरकारी निवेश केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत स्पोर्ट्स टीम होने से देश के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही मोरक्को के वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को भी एक नई डिजिटल ताकत मिलती है।
विदेशी फुटबॉल का कड़ा विकल्प छोड़ चुना मोरक्को का साथ
मोरक्को की राष्ट्रीय टीम की एक और सबसे बड़ी ताकत दुनिया भर में फैले उसके प्रवासी नागरिक और खिलाड़ी हैं। इस मुख्य टीम में सबसे अधिक संख्या उन स्टार खिलाड़ियों की है, जिनका जन्म विदेशों में हुआ है। इनमें प्रमुख रूप से अशरफ हकीमी और युवा सनसनी अयूब बुआदी शामिल हैं।
सबसे गौरवशाली बात यह है कि फ्रांस या स्पेन जैसे अत्यधिक विकसित देशों के लिए खेलने का विकल्प होने के बावजूद इन युवा खिलाड़ियों ने अपने माता-पिता के मूल देश मोरक्को का प्रतिनिधित्व करना चुना। खिलाड़ियों का यह अटूट समर्पण दुनिया को यह कड़ा संदेश देता है कि सही नीतियों के परिणाम हमेशा ऐतिहासिक होते हैं।
साल 2030 फुटबॉल विश्व कप की संयुक्त मेजबानी पर नजर
मैदान पर मोरक्को का यह बेहतरीन प्रदर्शन केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके पुराने औपनिवेशिक नैरेटिव को भी पूरी तरह बदल रहा है। आज जब मोरक्को के खिलाड़ी फ्रांस, स्पेन या बेल्जियम को हराते हैं, तो वे खेल इतिहास को पूरी तरह अपनी नई शर्तों पर लिख रहे होते हैं।
आगामी अफ्रीका कप ऑफ नेशन्स (AFCON) और साल 2030 वर्ल्ड कप की संयुक्त मेजबानी को ध्यान में रखते हुए मोरक्को ने अपने मुख्य कोच वालिद रेग्रागुई की जगह अब मोहम्मद उआहबी को जिम्मेदारी सौंपी है। यह एक दूरगामी दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है ताकि टीम 2030 तक अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ शिखर पर पहुंच सके।

