Tamil Nadu News: अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभालते ही कई चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। उन्होंने अपने कुछ करीबी सहयोगियों को बड़े प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया है। इन नियुक्तियों को लेकर अब राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
फिल्मों में पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाने वाले विजय असल जिंदगी में अब वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की बैठकें ले रहे हैं। कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले अभिनेता का मुख्यमंत्री बनना काफी दिलचस्प है। हालांकि, उनके शुरुआती प्रशासनिक कदमों की विपक्ष द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही है।
निजी ज्योतिषी और फिल्म निर्माता को मिले सरकारी पद
मुख्यमंत्री विजय ने अपने निजी ज्योतिषी रिकी राधन पंडित को मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी आखिरी फिल्म के निर्माता के. वेंकट नारायण को दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि बनाया। इस नियुक्ति के बाद विपक्ष ने सरकार पर हितों के टकराव का आरोप लगाया है।
ज्योतिषी को सरकारी पद देने पर सहयोगी दलों ने भी नाराजगी जताई। पेरियार की तार्किक सोच वाले राज्य में अंधविश्वास को बढ़ावा देने का आरोप लगा। चौतरफा दबाव के कारण फ्लोर टेस्ट के महज 48 घंटे के भीतर ही ज्योतिषी की नियुक्ति का सरकारी आदेश रद्द करना पड़ा।
विवादों में घिरी विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’
राजनीति में आने से पहले थलापति विजय अपनी अंतिम फिल्म ‘जन नायकन’ की शूटिंग कर रहे थे। सेंसर बोर्ड के साथ सैन्य चित्रण और धार्मिक भावनाओं को लेकर यह फिल्म कानूनी विवाद में फंस गई। इसके बाद इंटरनेट पर इसका प्रिंट लीक होने से मेकर्स को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
इस संकट के समय बेंगलुरु के बड़े बिजनेसमैन और केवीएन प्रोडक्शंस के चेयरमैन के. वेंकट नारायण उनके संकटमोचक बने। जब विजय सत्ता में आए, तो उन्होंने नारायण को दिल्ली में कैबिनेट मंत्री के दर्जे वाला पद सौंप दिया। विपक्षी दल बीजेपी और डीएमके ने इसे रेवड़ी संस्कृति करार दिया है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट और रियल एस्टेट टायकून हैं नारायण
के. वेंकट नारायण का प्रोफाइल केवल एक फिल्म निर्माता तक सीमित नहीं है। वह एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी और लॉ ग्रेजुएट भी हैं। फिल्म बिजनेस में आने से पहले उन्होंने देश की जानी-मानी रियल एस्टेट कंपनी प्रिस्टीज ग्रुप में सीईओ के रूप में काम किया था।
उन्होंने साल 2020 में केवीएन प्रोडक्शंस की शुरुआत की थी। इस स्टूडियो ने दक्षिण भारतीय सिनेमा में तेजी से अपनी पहचान बनाई। इस कंपनी ने ‘आरआरआर’, ‘एनिमल’, ‘देवरा’ और ‘कल्कि’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों का कर्नाटक के सिनेमाई बाजार में बड़े पैमाने पर डिस्ट्रीब्यूशन भी संभाला है।
गैर-तमिल चेहरे को बड़ा प्रशासनिक पद देने पर सवाल
विपक्ष का सबसे बड़ा हमला यह है कि वेंकट नारायण मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं। आलोचकों के अनुसार, जिस व्यक्ति को तमिल भाषा, स्थानीय संस्कृति और प्रशासनिक बारीकियों का जमीनी अनुभव नहीं है, उसे देश की राजधानी में तमिलनाडु का मुख्य चेहरा क्यों बनाया गया?
तमिलनाडु की सरकार अब अपनों पर मेहरबानी करने के आरोपों से पूरी तरह घिर चुकी है। जहां एक तरफ थलापति विजय की अंतिम फिल्म कानूनी चक्रव्यूह में अटकी हुई है, वहीं दूसरी तरफ उनकी नई सरकार की राजनीतिक साख इन विवादित नियुक्तियों के कारण दांव पर लग गई है।

