राज्यसभा में बढ़ा एनडीए का संख्या बल, नवनिर्वाचित आठ सांसदों के शपथ लेने से सरकार हुई और मजबूत

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New Delhi News: संसद के उच्च सदन राज्यसभा में सोमवार को आठ नवनिर्वाचित सांसदों के शपथ ग्रहण करने के साथ ही सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। इन नए सदस्यों के आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन का संख्या बल काफी बढ़ गया है।

इस राजनीतिक बदलाव से केंद्र सरकार को आने वाले दिनों में अपने महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को बिना किसी बड़े गतिरोध के आगे बढ़ाने में पहले के मुकाबले अधिक सहूलियत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि खासकर संविधान संशोधन जैसे बड़े विधेयकों पर अब सरकार की संभावनाएं मजबूत होंगी।

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सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दिलाई सभी नए सांसदों को शपथ

राज्यसभा के माननीय सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति के विशेष कक्ष में अलग से अपने हाथ में भारत के संविधान की प्रति लेकर पूरी तरह हिंदी भाषा में शपथ ली है।

मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा बाकी अन्य सात सदस्यों ने सीधे सदन के भीतर सबके सामने अपनी सदस्यता की शपथ ग्रहण की। शपथ लेने वाले इन माननीय सदस्यों में सत्तारूढ़ भाजपा के तरुण चुघ, गुजरात से जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया और मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से एम. नागराजा, महाराष्ट्र से राजेंद्र हीरालाल जैन शामिल हैं।

मणिपुर और राजस्थान के सांसदों ने भी ग्रहण की सदस्यता

इन नेताओं के साथ ही मणिपुर से अधिकारीमयुम शारदा देवी तथा राजस्थान से अलका सिंह ने भी उच्च सदन की सदस्यता ग्रहण की। इस वीआईपी शपथ ग्रहण समारोह के गरिमामयी क्षणों के दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे।

सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सभी माननीय नए सदस्यों का सदन में दिल से स्वागत करते हुए उन्हें एक सफल संसदीय कार्यकाल की ढेरों शुभकामनाएं दीं। इन नए सदस्यों के शामिल होने के बाद अब कुल 242 सदस्यीय राज्यसभा में एनडीए का कुल आधिकारिक आंकड़ा बढ़कर सीधे 141 तक पहुंच गया है।

मनोनीत और निर्दलीय सांसदों के साथ बढ़ा सरकार का ग्राफ

संसदीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि सदन के 10 मनोनीत और निर्दलीय सांसदों का बाहरी समर्थन भी इसमें जोड़ दिया जाए, तो संकट के समय सरकार के पक्ष में कुल 151 सांसदों का मजबूत समर्थन माना जा रहा है। यह बड़ा आंकड़ा सदन में साधारण बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है।

यह मजबूत स्थिति सरकार को संसद में सामान्य विधेयकों को आसानी से पारित कराने में बहुत बड़ी कूटनीतिक राहत देती है। हालांकि, गंभीर संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा अभी भी सत्ता पक्ष को पूरी तरह से हासिल नहीं हुआ है, जिससे भविष्य की राह चुनौतीपूर्ण है।

बीजद और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियां दे सकती हैं साथ

इसके बावजूद वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दल यदि भविष्य में जरूरत पड़ने पर समर्थन देते हैं, तो सरकार इस बड़े लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती है। इन क्षेत्रीय दलों ने पहले भी कई राष्ट्रीय हितों के विधेयकों पर सरकार का साथ दिया है।

आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त सीटों पर होने वाले महत्वपूर्ण उपचुनाव भी सत्ता पक्ष के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। बढ़े हुए इस संख्या बल के कारण केंद्र सरकार भविष्य में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे लंबित विधेयकों को गति दे सकती है।

महिला आरक्षण और सीटों के पुनर्निर्धारण पर रहेगी सरकार की नजर

इसके अलावा केंद्र सरकार देश भर में लोकसभा की सीटों के नए सिरे से पुनर्निर्धारण (Delimitation) जैसे बड़े और ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयकों को भी संसद में आगे बढ़ाने का कड़ा प्रयास कर सकती है। हालांकि, लोकसभा में सरकार के सामने अभी भी आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की बड़ी चुनौती बरकरार है।

इस बीच, मुख्य विपक्षी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दोबारा राज्यसभा में आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में मान्यता मिल गई है। कर्नाटक राज्य से लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे खरगे ने शपथ लेने के बाद मीडिया से अपनी प्राथमिकताएं साझा कीं।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में देश की आम जनता की आवाज, उनकी मुख्य चिंताओं और आकांक्षाओं को पूरी मजबूती से सदन में उठाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाएंगे।

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